देवर्षि नारद

जिसप्रकार नारदमुनि भगवान का अखंड स्मरण और स्तुति करते हैं; उसीप्रकार श्रीकृष्णजी भी अखंड अपने भक्त का स्मरण एवं स्तुति करते हैं । श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इनकी महत्ता को स्वीकार करते हुए कहा है – ‘देवर्षीणाम् च नारद:।’

‘सीबीआई’ की असफलता अथवा राष्ट्रवादी की गलत जांच का परिणाम – सनातन संस्था

सुशांतसिंह राजपूत की मृत्यु के प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने मुंबई पुलिस से जांच की प्रक्रिया लेकर वह सीबीआई को सौंपने के कारण हुई अपकीर्ति के कारण राष्ट्रवादी के नेता सीबीआई को लक्ष्य बनाकर वक्तव्य कर रहे हैं ।

‘लॉकडाउन’ के समय में श्री गणेशजी के विधिवत पूजन के लिए मार्गदर्शक सनातन संस्‍था के ‘गणेश पूजा एवं आरती’ एप !

श्री गणेशजी के आगमन से लेकर विसर्जन तक किस प्रकार श्री गणेशजी के विविध अंगों की उपासना की जा सकती है, इस एप में इसकी जानकारी दी गई है ।

सनातन संस्था की ओर से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में ऑनलाइन प्रवचन

सनातन संस्था की ओर से साधना का हमारे जीवन में महत्त्व व शास्त्रानुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कैसे मनाएं, इस विषय पर देहली व फरीदाबाद के जिज्ञासुओं के लिए ऑनलाइन प्रवचन का आयोजन किया गया ।

‘स्वयं की चल और अचल संपत्ति का ‘सत्पात्रे दानम्’ हो’, इस उद्देश्य से यदि वे सनातन संस्था को दान करने के इच्छुक हों, तो अपने जीवनकाल में ही अर्पण करें !

अनेक जन स्वयं की चल (धन, सोना, वाहन इत्यादि) और अचल (घर, ‘फार्म हाउस’, दुकान, भूमि (प्लॉट), कृषि भूमि आदि) संपत्ति सनातन संस्था को देने की इच्छा व्यक्त करते हैं ।

जलप्रलय की दृष्टि सेे भौतिक स्तर पर क्या पूर्व तैयारी करनी चाहिए ? : भाग ३ 

‘बाढपीडित क्षेत्र के नागरिकों को किस प्रकार से पूर्व तैयारी करनी चाहिए ?’, इस संदर्भ के मार्गदर्शक सूत्र आगे दिए हैं ।

आपातकालमें जीवनरक्षा हेतु आवश्यक तैयारी : भाग – ९

बाढ, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं में यातायात ठप रहता है । इससे अन्य वस्तुओं के साथ-साथ औषधियां मिलना भी कठिन हो जाता है ।

पुणे जिले के धर्मप्रेमियों के लिए ३१ जुलाई को साधना के संदर्भ में सनातन संस्था की ओर से ‘ऑनलाईन’ मार्गदर्शन

पुणे जिले के धर्मप्रेमियों के लिए ३१ जुलाई को साधना के संदर्भ में ‘ऑनलाईन’ मार्गदर्शन किया गया ।

आरनमुळा कण्णाडी अर्थात भगवानके मुखदर्शनके लिए बनाया गया विशेष दर्पण !

मंदिरों में देवता का पूजन करते समय उपचार के अंतर्गत दर्पण उपचार में देवता को दर्पण दिखाते हैं अथवा दर्पण से सूर्य की किरण भगवान की ओर परावर्तित करते हैं ।