गणेशभक्‍तों द्वारा सनातन संस्‍था के ‘गणेश पूजा एवं आरती’ एंड्रॉइड एप का उत्‍स्‍फूर्त प्रत्‍युत्तर : १ लाख से अधिक डाउनलोड्‌स

श्रद्धालुओं के लिए श्री गणेशभूर्ति की प्रतिष्‍ठापना करना सुलभ हो; इसके लिए सनातन संस्‍था की ओर से ‘गणेश पूजा एवं आरती’ एंड्रॉइड एप बनाया गया ।

अधिक मास में सनातन संस्‍था के ग्रंथ और लघुग्रंथ अन्‍यों को देकर सर्वश्रेष्‍ठ ज्ञानदान का फल प्राप्‍त करें !

सनातन संस्‍था के ग्रंथ पाठकों को सरल भाषा में अमूल्‍य ज्ञान देते हैं, साथ ही उनमें धर्म के प्रति श्रद्धा भी बढाते हैं । इसके कारण अधिक मास में इस प्रकार के ग्रंथदान के द्वारा पुण्‍यसंचय सहित आध्‍यात्मिक लाभ भी उठाएं ।

‘आईआईटी इंदौर’ में संस्कृत भाषा में पढाया जा रहा है प्राचीन भारतीय विज्ञान !

आईआईटी इंदौर’ में छात्रों को संस्कृत भाषा में प्राचीन भारतीय विज्ञान की शिक्षा दी जा रही है । इसके लिए पूरे विश्व के ७५० से अधिक छात्रों ने प्रवेश लिया है ।

‘कोरोना’ महामारी की पृष्ठभूमि पर शास्त्र के विधान के अनुसार निम्नांकित पद्धति से श्राद्धविधि करें !

पितृपक्ष में पितृलोक के पृथ्वीलोक के सर्वाधिक निकट आने से इस काल में पूर्वजों को समर्पित अन्न, जल और पिंडदान उन तक शीघ्र पहुंचता है ।

अन्य पंथ तो पूर्वजों के लिए कुछ नहीं करते, फिर उन्हें कष्ट नहीं होता है क्या ?

हिन्दू हो, मुसलमान हो अथवा ईसाई । जो भी शास्त्रों का पालन करेगा, उसे लाभ होगा । जो नहीं करेगा, उसकी हानि निश्‍चित है; परंतु अनेक पंथों में हिन्दू धर्म में वर्णित बातें अलग-अलग पद्धति से अपनायी जाती हैं ।

कोरोना महामारी के काल में श्री गणेशमूर्ति का आगमन, पूजन और विसर्जन !

वर्तमान में कोरोना और तत्सम आपातकाल में भी हिन्दू धर्म में धर्माचरण के कुछ विकल्प बताए हैं । वे विकल्प कौन-से हैं ? इस विषय में जानने के लिए ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि और सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस से भेंटवार्ता हुई ।

कलियुग के दोष नष्ट करने के लिए तपस्या करनेेवाले ऋषिगणों के विघ्न हरण करनेवाला इडगुंजी (कर्नाटक) का श्री महागणपति !

इडगुंजी मंदिर की मुख्य मूर्ति भी चौथी अथवा पांचवीं शताब्दी की है । यह द्विभुजा श्री गणेशमूर्ति पाषाण पर खडी है ।

हनुमानजी द्वारा लंकादहन

हनुमानजी लंका जलाने के लिए जब स्वयं को अपराधी मान रहे थे, उसी समय हनुमानजी को दिव्य वाणी सुनाई दी – राक्षसों की लंका जल गई, पर सीता पर कोई आंच नहीं आई । तब हनुमानजी ने अपना मनोरथ पूर्ण समझा ।

जलप्रलय की दृष्टि सेे भौतिक स्तर पर क्या पूर्व तैयारी करनी चाहिए ? : भाग ४ 

वर्ष २०१९ में महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों के कुछ शहरों में भीषण बाढ आने पर योग्य कृत्य करने का ज्ञान न होने के कारण अनेक नागरिक भ्रमित हो गए थे । ऐसे अवसर पर नागरिकों द्वारा अयोग्य कृत्य करने अथवा निर्णय लिए जाने की संभावना होती है ।

आपातकालमें जीवनरक्षा हेतु आवश्यक तैयारी : भाग – १०

पारिवारिक स्तर पर विचार करते समय घर के विषय में, आर्थिक स्तर पर विचार करते समय संपत्ति के विषय में तथा सामाजिक दायित्व के अंतर्गत समाज के लिए हम क्या कर सकते हैं, इस विषय में जानकारी दी गई है ।