‘चक्रवाती तूफान, भूस्खलन, भूकंप, बाढ, यातायात बंदी जैसी संकटालीन स्थिति किसी भी क्षण उत्पन्न हो सकती है । ऐसी स्थिति में इत्र, कपूर, उदबत्ती, गोमूत्र आदि सनातन संस्था के सात्त्विक उत्पाद उपलब्ध नहीं होंगे । ऐसी स्थिति में साधक निम्नांकित पद्धति से मानस-उपाय कर सकते हैं ।

१. मानस-उपाय करने का महत्त्व !
संकटकालीन स्थिति में जब उपाय के साधन उपलब्ध नहीं होते, ऐसे समय में मानस-उपाय करना सहजता से संभव है । ये उपाय भावपूर्ण किए, तो उससे स्थूलरूप से उपाय करने के समान ही लाभ मिलता है ।
२. इत्र, कपूर और उदबत्ती से मानस-उपाय कैसे करने चाहिएं ?
इत्र, कपूर आदि उपलब्ध होनेपर साधक जिस प्रकार आध्यात्मिक उपाय करते हैं, उसी प्रकार के उपाय उनके उपलब्ध न होने की स्थिति में भी किए जा सकते हैं । ‘अन्य समय उपाय करते समय हम जो कृत्य करते हैं, वो अब भी कर रहे हैं’, यह भाव रखकर मानस पद्धति से उपाय करें ।
३. स्वयंपर व्याप्त आवरण निकालें
नियतकालिक ‘सनातन प्रभात’, सनातन बही, सनातन पंचांग आदि के द्वारा मानस पद्धति से स्वयंपर व्याप्त आवरण निकालें ।
४. वास्तुशुद्धि कैसे करनी चाहिए ?
घर में गोमूत्र उपलब्ध न हो, तो वास्तुशुद्धि हेतु निम्नांकित उपाय किया जा सकता है । एक गिलास में थोडा सा पानी लें । उसपर दाहिना हाथ रखकर आजकल समष्टि स्तर के कष्ट दूर होने हेतु जो ‘निर्गुण’ नामजप किया जा रहा है, वह नामजप १० मिनट करें । इस नामजप से भारित जल को छिडककर हम वास्तुशुद्धि कर सकते हैं । घर में मासिक धर्मवाली महिला हो अथवा किसी व्यक्ति को सोयर-सूतक हो, तो वह व्यक्ति इस उपाय को स्वयं न कर अन्य साधक उपाय करें ।
साधकों, ‘मानस-उपाय भावपूर्ण किए, तो प्रत्यक्ष उपायों की भांति ही उनका लाभ होनेवाला है’, यह श्रद्धा रखकर ये उपाय करें !’
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