विश्व के ५८ सहस्र ७०० बडे बांधों में से अनेक बांधों की कालमर्यादा समाप्त होने से विश्व को संकट ! – संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र के विद्यापीठांतर्गत आनेवाले कनाडा में ‘जल, पर्यावरण और आरोग्य संस्था’ द्वारा ‘कालबाह्य हो रहा जलसंग्रह : नया संकट’ नाम से यह ब्योरा तैयार किया है । इस ब्योरे के अनुसार अनेक बांधों की आयु पहले ही समाप्त हो चुकी है अथवा आगामी कुछ समय में समाप्त होनेवाली है ।

हिन्दू धर्म

वास्तव में हिन्दू शब्द की व्याख्या है ‘हीनानि गुणानि दूषयति इति हिंदु ।’ अर्थात ‘हीन गुणों का नाश करनेवाला हिन्दू है ।’

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आयुर्वेद के नियमों का पालन करें !

शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् । अर्थात, धर्माचरण के लिए (साधना करने के लिए) शरीर का स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है ।

तुमकुरू की श्री महालक्ष्मी मद्दरलक्कम्म के आगमन के पश्चात उनके भक्तों का सनातन के विषय में गौरवोद्गार और साधकों को हुई अनुभूतियां

मंगळूरु सेवाकेंद्र में तुमकुरू की श्री महालक्ष्मी मद्दरलक्कम्मा के आगमन के पश्चात उनके भक्त श्री. पवनकुमार यजमान के सनातन के विषय में गौरवोद्गार और साधकों को हुई अनुभूति

बिहार एवं उत्तर प्रदेश में दत्त जयंती निमित्त ‘ऑनलाइन प्रवचन’ तथा ‘सामूहिक जप’ का नियोजन

समाज को धर्मशिक्षा मिले इस हेतु भगवान दत्तात्रेय की जयंती के अवसर पर २६ दिसंबर २०२० को सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा ‘ऑनलाइन साधना सत्संग’ का आयोजन किया गया ..

सनातन संस्था की ओर से आयोजित सामूहिक नामजप कार्यक्रम को जिज्ञासुओं का उत्स्फूर्त प्रतिसाद

हिन्दू जनजागृति समिति एवं सनातन संस्था की ओर से दत्तजयंती निमित्त से ऑनलाईन स्वरूप में आयोजित सामूहिक नामजप कार्यक्रम को समाज से उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिला ।

सनातन आश्रम पनवेल के साधक डॉ. दीपक जोशी ‘कोरोना योद्धाʼपुरस्कार से सम्मानित

पृष्ठभूमि पर बेंगळूरु की ‘स्मृति साधनाʼनामक स्वयंसेवी संस्था द्वारा ऐसे लोगों को ‘कोरोना योद्धा’ पुरस्कार देकर गौरवान्वित किया है । सनातन के पनवेल के साधक डॉ. दीपक जोशी ने लॉकडाउन के काल में अनेक रोगियों को समुपदेशन करना, उन्हें धीरज देना, साधना बताकर स्थिर जीवन जीने की दिशा देना आदि विशेष प्रयत्न किए थे, इसके लिए उन्हें यह पुरस्कार देकर गौरवान्वित किया ।

भक्ति के सुंदर उदाहरण वाला जनाबाई के जीवन का प्रसंग

जनाबाई जैसे भक्त बनने के लिए उनकी ही तरह हर काम में, हर प्रसंग में ईश्‍वर को अपने साथ अनुभव करना, उनसे हर प्रसंग का आत्मनिवेदन करते रहना, उनको ही अपना सब मानकर अपनी सब बातें बताना आवश्यक है ।

कंधों में वेदना होने पर किए जानेवाले कुछ महत्त्वपूर्ण व्‍यायाम प्रकार

कंधों की वेदना की तीव्रता ६० प्रतिशत से अधिक होने पर चिकित्‍सक से परामर्श लेना चाहिए । वेदना की तीव्रता ६० प्रतिशत से अल्‍प हो, तो स्नायु शक्‍तिशाली बनाने के लिए आगे दिए गए व्‍यायाम चरण दर चरण करने चाहिए ।