नियमितरूप से प्राणायाम, व्यायाम एवं योगासन कर शरीर की प्रतिकार क्षमता बढाएं !

उसके बिना हमारा घर नहीं चल सकता । व्यावहारिकदृष्टि से जैसे यह आवश्यक है, वैसे ही अपनी देह चलाने के लिए उसमें योग्य मात्रा में प्राणशक्ति (चेतनाशक्ति) प्रवाहित होना

और उसका नियमन होना अत्यंत आवश्यक है । उसके लिए संतुलित आहार का सेवन, योग्य दिनचर्या का पालन और नियमित व्यायाम करना आवश्यक होता है । इससे चेतनाशक्ति कार्यरत रहने में सहायता होती है ।

शरीर को मर्दन करने की शास्त्रीय दृष्टि से योग्य पद्धति एवं मर्दन के लाभ !

शरीर की क्षमता से अधिक परिश्रम करने पर, एकाएक आपातकालीन कृति करनी पड जाए अथवा कृति अनुचित पद्धति से की जाए तो अपने स्नायु थक जाते हैं अथवा उनमें अकडन उत्पन्न हो जाती है । ऐसे समय पर उनमें अशुद्ध द्रव्य निर्माण होते हैं । वे शरीर की वाहिनियों में पूर्णरूप से अवशोषित नहीं होते अथवा धीरे-धीरे अवशोषित होते हैं । इससे स्नायुओं में वेदना होने लगती है ।

कंधों का दर्द होने पर किए जानेवाले कुछ महत्त्वपूर्ण व्यायामप्रकार

आपातकाल में वैद्य अथवा औषधि मिलने की निश्चती न होने से बीमारी टालने के लिए अथवा नियंत्रण में रखने के लिए अभी से हम सभी ये व्यायामप्रकार करना प्रारंभ करेंगे ।

कंधों में वेदना होने पर किए जानेवाले कुछ महत्त्वपूर्ण व्‍यायाम प्रकार

कंधों की वेदना की तीव्रता ६० प्रतिशत से अधिक होने पर चिकित्‍सक से परामर्श लेना चाहिए । वेदना की तीव्रता ६० प्रतिशत से अल्‍प हो, तो स्नायु शक्‍तिशाली बनाने के लिए आगे दिए गए व्‍यायाम चरण दर चरण करने चाहिए ।

भार उठाने की योग्य पद्धतियां !

दैनिक काम करते समय अथवा कहीं बाहर जाते समय हमें अनेक प्रकार के भार उठाने पडते हैं । उन्हें उठाने में हमारे शरीर पर जाने-अनजाने तनाव आता है । अयोग्य पद्धति से भार उठाने से शरीर की हानि हो सकती है ।

प्राणायाम, व्यायाम और योगासन कर शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढाएं !

नियमित रूप से प्राणायाम, व्यायाम और योगासन कर शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढाएं और आपातकाल का सामना करने के लिए अपने शरीर और मन की तैयारी करें !

फीजियोथेरेपी

अपने शरीर के किसी पीडित अंग, स्नायु तथा हड्डियों को पूर्ववत करने के व्यायाम और फीजियोथेरेपी ये दो भिन्न पद्धति हैं ।