नियमितरूप से प्राणायाम, व्यायाम एवं योगासन कर शरीर की प्रतिकार क्षमता बढाएं !
उसके बिना हमारा घर नहीं चल सकता । व्यावहारिकदृष्टि से जैसे यह आवश्यक है, वैसे ही अपनी देह चलाने के लिए उसमें योग्य मात्रा में प्राणशक्ति (चेतनाशक्ति) प्रवाहित होना
और उसका नियमन होना अत्यंत आवश्यक है । उसके लिए संतुलित आहार का सेवन, योग्य दिनचर्या का पालन और नियमित व्यायाम करना आवश्यक होता है । इससे चेतनाशक्ति कार्यरत रहने में सहायता होती है ।
