सनातन संस्था की ओर से आयोजित सामूहिक नामजप कार्यक्रम को जिज्ञासुओं का उत्स्फूर्त प्रतिसाद
हिन्दू जनजागृति समिति एवं सनातन संस्था की ओर से दत्तजयंती निमित्त से ऑनलाईन स्वरूप में आयोजित सामूहिक नामजप कार्यक्रम को समाज से उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिला ।
हिन्दू जनजागृति समिति एवं सनातन संस्था की ओर से दत्तजयंती निमित्त से ऑनलाईन स्वरूप में आयोजित सामूहिक नामजप कार्यक्रम को समाज से उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिला ।
पृष्ठभूमि पर बेंगळूरु की ‘स्मृति साधनाʼनामक स्वयंसेवी संस्था द्वारा ऐसे लोगों को ‘कोरोना योद्धा’ पुरस्कार देकर गौरवान्वित किया है । सनातन के पनवेल के साधक डॉ. दीपक जोशी ने लॉकडाउन के काल में अनेक रोगियों को समुपदेशन करना, उन्हें धीरज देना, साधना बताकर स्थिर जीवन जीने की दिशा देना आदि विशेष प्रयत्न किए थे, इसके लिए उन्हें यह पुरस्कार देकर गौरवान्वित किया ।
जनाबाई जैसे भक्त बनने के लिए उनकी ही तरह हर काम में, हर प्रसंग में ईश्वर को अपने साथ अनुभव करना, उनसे हर प्रसंग का आत्मनिवेदन करते रहना, उनको ही अपना सब मानकर अपनी सब बातें बताना आवश्यक है ।
कंधों की वेदना की तीव्रता ६० प्रतिशत से अधिक होने पर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए । वेदना की तीव्रता ६० प्रतिशत से अल्प हो, तो स्नायु शक्तिशाली बनाने के लिए आगे दिए गए व्यायाम चरण दर चरण करने चाहिए ।
१६.१२.२०२० से १३.१.२०२१ तक धनुर्मास था । इस मास के पांच गुरुवार और शुक्रवार अत्यंत महत्त्वपूर्ण होते हैं । चंद्र की संक्रांति की अधिकतावाले इस मास में भगवान की आराधना, भगवान का नामजप, भागवत कथा श्रवण, व्रत, दान, दीपदान, सत्संग और निष्काम कर्म करने का विशेष माहात्म्य है । इस मास में आनेवाली एकादशी को ‘वैकुंठ एकादशी’ कहते हैं । धनुर्मास में इस दिन को सर्वाधिक महत्त्व होता है ।
इटली की राजधानी रोम में ईसाई नववर्ष के अवसर पर की गई आतिषबाजी के कारण सड़कों पर सहस्त्रों (हजारों) पक्षियों के मरने के चार दिन ही बाद, भारत के कुछ राज्यों में भी अचानक पक्षियों के मरने की सूचना मिली है।
देहली – दत्तजयंती निमित्त सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से हाल में ही एक ‘ऑनलाईन’ सत्संग का आयोजन किया गया । इस समय सनातन की साधिका कु. पूनम चौधरी और श्रीमती. राजरानी माहुर ने उपस्थितों का मार्गदर्शन किया । कु. चौधरी ने श्री दत्तके द्वारा किये २४ गुण गुरुओं के संदर्भ में … Read more
सूरत की ३६ वर्षीय महिला दयाबेन भरतभाई बुधेलिया की ब्रेन में गांठ होने के कारण उसे निकालने के लिए सफलता से ‘ओपन सर्जरी’ की गई । उन्हें ‘अवेक एनेस्थेसिया’ दिया गया था । इस कारण वे सर्जरी के समय जागी थी । सवा घंटे की सर्जरी में वे सतत श्रीमद्भगवत्गीता के श्लोक का पठन कर रहीं थीं ।
अष्टांग साधना में स्वभावदोष निर्मूलन करने का अनन्य साधारण महत्त्व है । इस प्रक्रिया का महत्त्व विस्तार से देखेंगे । धर्मशास्त्र में भी कहा है कि मनुष्य को षड्रिपुओं का त्याग करना चाहिए । संतों ने भी कहा है कि षड्रिपु मनुष्य के शत्रु हैं ।
साधना करते समय गुरुकृपा अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है । शिष्य की वास्तविक आध्यात्मिक प्रगति गुरुकृपा से ही होती है । गुरु अपने शिष्य को अलग-अलग माध्यम से सीखाते रहते हैं । गुरुकृपा के माध्यम से व्यक्ति का ईश्वरप्राप्ति की ओर अग्रसर होने को ही गुरुकृपायोग कहा जाता है । गुरुकृपायोग के अनुसार साधना के २ अंग हैं – एक है व्यष्टि साधना और दूसरी है समष्टि साधना !