धनुर्मास की महिमा

१६.१२.२०२० से १३.१.२०२१ तक धनुर्मास था । इस मास के पांच गुरुवार और शुक्रवार अत्यंत महत्त्वपूर्ण होते हैं । चंद्र की संक्रांति की अधिकतावाले इस मास में भगवान की आराधना, भगवान का नामजप, भागवत कथा श्रवण, व्रत, दान, दीपदान, सत्संग और निष्काम कर्म करने का विशेष माहात्म्य है । इस मास में आनेवाली एकादशी को ‘वैकुंठ एकादशी’ कहते हैं । धनुर्मास में इस दिन को सर्वाधिक महत्त्व होता है ।

देश के अनेक राज्यों में अचानक मर रहे हैं पक्षी !

इटली की राजधानी रोम में ईसाई नववर्ष के अवसर पर की गई आतिषबाजी के कारण सड़कों पर सहस्त्रों (हजारों) पक्षियों के मरने के चार दिन ही बाद, भारत के कुछ राज्यों में भी अचानक पक्षियों के मरने की सूचना मिली है।

दत्त जयंती निमित्त ‘ऑनलाईन’ सत्संग एवं सामूहिक नामजप का आयोजन

देहली – दत्तजयंती निमित्त सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से हाल में ही एक ‘ऑनलाईन’ सत्संग का आयोजन किया गया । इस समय सनातन की साधिका कु. पूनम चौधरी और श्रीमती. राजरानी माहुर ने उपस्थितों का मार्गदर्शन किया । कु. चौधरी ने श्री दत्तके द्वारा किये २४ गुण गुरुओं के संदर्भ में … Read more

ब्रेन सर्जरी के समय महिला मरीज द्वारा श्रीमद्भगवत्गीता के श्लोक का पठन !

सूरत की ३६ वर्षीय महिला दयाबेन भरतभाई बुधेलिया की ब्रेन में गांठ होने के कारण उसे निकालने के लिए सफलता से ‘ओपन सर्जरी’ की गई । उन्हें ‘अवेक एनेस्थेसिया’ दिया गया था । इस कारण वे सर्जरी के समय जागी थी । सवा घंटे की सर्जरी में वे सतत श्रीमद्भगवत्गीता के श्लोक का पठन कर रहीं थीं ।

सत्‍संग ९ : स्‍वभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया का महत्त्व

अष्‍टांग साधना में स्‍वभावदोष निर्मूलन करने का अनन्‍य साधारण महत्त्व है । इस प्रक्रिया का महत्त्व विस्‍तार से देखेंगे । धर्मशास्‍त्र में भी कहा है कि मनुष्‍य को षड्रिपुओं का त्‍याग करना चाहिए । संतों ने भी कहा है कि षड्रिपु मनुष्‍य के शत्रु हैं ।

सत्संग ८ : साधना के अंग

साधना करते समय गुरुकृपा अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है । शिष्य की वास्तविक आध्यात्मिक प्रगति गुरुकृपा से ही होती है । गुरु अपने शिष्य को अलग-अलग माध्यम से सीखाते रहते हैं । गुरुकृपा के माध्यम से व्यक्ति का ईश्वरप्राप्ति की ओर अग्रसर होने को ही गुरुकृपायोग कहा जाता है । गुरुकृपायोग के अनुसार साधना के २ अंग हैं – एक है व्यष्टि साधना और दूसरी है समष्टि साधना !

भगवान कार्तिकेय के स्वरूपवाला तेजस्वी नक्षत्र : कृत्तिका !

भारतीय कालगणना में चैत्रादी मास के नाम खगोल शास्त्र पर आधारित है । कार्तिक मास में सूर्यास्त होने पर कृत्तिका नक्षत्र पूर्वक्षितिज पर उदय होता है; साथ ही कार्तिक मास में पूर्णिमा तिथि के समय चंद्र कृत्तिका नक्षत्र में होता है ।

सत्संग ७ : सत्संग का महत्व

सत्संग क्या होता है ?, सत् का संग होता है । सत् का अर्थ ईश्वर अथवा ब्रह्मतत्त्व और संग का अर्थ है सान्निध्य ! हमें प्रत्यक्षरूप से ईश्वर का सान्निध्य मिलना असंभव है; इसलिए संत, जिन्हें ईश्वर का सगुण रूप कहा जाता है; उनका सान्निध्य सर्वश्रेष्ठ सत्संग होता है ।

वर्ष २०२१ में आनेवाले गुरुपुष्यामृत योग की विशेषताएं !

गुरुवार को पुष्य नक्षत्र आने से ‘गुरुपुष्यामृत योग’ होता है । इस दिन ‘सुवर्ण खरीदना और शुभकार्य करना’, ऐसा करने की प्रथा है । सर्व लौकिक अथवा व्यवहारिक कार्य के लिए यह योग शुभ माना जाता है । यह योग एक वर्ष में लगभग ३ अथवा ४ बार आता है ।

सत्संग ६ : नामजप में संख्यात्मक एवं गुणात्मक वृद्धि करने हेतु आवश्यक प्रयास

नामजप अथवा कोई भी सत्कर्म करते समय, महत्त्वपूर्ण पहलू है ईश्वर से प्रार्थना करना ! प्रार्थना करने के कारण हममें याचकवृत्ति उत्पन्न होकर हमारा अहंकार अल्प होने में सहायता मिलती है ।