आदर्श विवाहपत्रिका : विवाहपत्रिका सात्त्विक होने के लिए क्या करना चाहिए ?

विवाहपत्रिका आजकल प्रतिष्ठा का विषय बन गया है । अनेक पृष्ठों की, सुगंधित, मंहगी पत्रिकाओं को छापने की ओर समाज का झुकाव बढ गया है । ‘विवाह’ एक धार्मिक विधि होने से विवाहपत्रिका सात्त्विक हो और उससे धर्मप्रसार हो, इसके लिए प्रयास करना चाहिए । इस दृष्टि से विवाहपत्रिका के विविध घटक कैसे हाेने चाहिए, इसका विवेचन आगे किया है ।

श्रीरामनवमी के उपलक्ष्य में सनातन संस्था की ओर से झारखंड, उत्तरप्रदेश एवं बिहार में विविध उपक्रमों का आयोजन !

भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में चैत्र शुक्ल नवमी को हर्षोल्लास के साथ ‘श्रीरामनवमी’ का त्योहार मनाया जाता है । इस सात्त्विक एवं चैतन्यमय वातावरण में भक्तों ने ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ नामजप एवं संकीर्तन कर भगवान श्रीराम के चरणों में अपनी श्रद्धा एवं भक्ति अर्पित की ।

‘श्रीगुरु गौरव दीक्षा शताब्दी महोत्सव’ में सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले जी सम्मानित !

दत्त परंपरा के महान संत और शक्तिपात योग के प्रवर्तक प.पू. गुलवणी महाराज के दीक्षा शताब्दी महोत्सव के अवसर पर, सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बालाजी आठवले जी को सम्मानित किया गया । सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले जी की ओर से सनातन संस्था की सद्गुरु स्वाती खाडये ने या सम्मान स्वीकार किया ।

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता आलोक कुमार ने गोवा स्थित सनातन संस्था के रामनाथी आश्रम का दौरा किया !

सनातन संस्था की प्रशंसा करते हुए अधिवक्ता आलोक कुमार ने कहा, “सूक्ष्म जगत का अध्ययन और मार्गदर्शन करना सनातन संस्था की विशेषता है। इस कार्य को करते हुए परब्रह्म के साथ एकाकार होने की सीख यहां दी जाती है। विश्व हिंदू परिषद प्रत्यक्ष (स्थूल) जगत में कार्य करनेवाला संगठन है, जबकि सनातन संस्था का कार्य सूक्ष्म जगत से संबंधित है।”

श्रीरामनवमी के उपलक्ष्य में ‘रामनाम संकीर्तन’ अभियान का आयोजन करें !

रामनाम संकीर्तन का स्वरूप : रामराज्य के लिए प्रार्थना (५ मिनट), श्रीरामनाम का जप (५० मिनट), हिन्दू राष्ट्र की  प्रतिज्ञा (५ मिनट)

आइए भारत में पुनः एक बार ‘रामराज्य’ की ध्वजा (गुडी) स्थापित करने हेतु प्रतिबद्ध हो जाएं !

रामराज्य अर्थात ऐसा राज्य, जहां आध्यात्मिक श्रद्धा सुशासन में परिवर्तित होती है । आज के समय में भी भारत में आदर्श राजा, सात्त्विक प्रजा, सुशासन एवं सुरक्षा से युक्त रामराज्य स्थापित करना ही कालानुसार सच्ची धर्मस्थापना है ।

महाशिवरात्रि के अवसर पर सनातन संस्था द्वारा कई स्थानों पर ग्रन्थ प्रदर्शनी का आयोजन

इस प्रदर्शनी के माध्यम से सनातन संस्कृति, धर्मशास्त्र, बालसंस्कार, आयुर्वेद एवं अध्यात्म, राष्ट्र-धर्म जैसे विषयों के ग्रंथों का प्रचार-प्रसार किया गया तथा सनातन धर्म एवं संस्कृति के प्रति समाज में जागरूकता लाने का भी प्रयास किया ।

साधकों, कालानुसार साधना के रूप में रामराज्य की स्थापना के लिए ‘श्रीराम जय राम जय जय राम ।’ नामजप करें !

अब तीसरे विश्वयुद्ध का समय निकट आ रहा है, इसलिए उसमें अपनी रक्षा हो और आगे ‘रामराज्य की स्थापना हो’, इसके लिए ‘श्रीराम जय राम जय जय राम ।’ यह जप कम से कम १० माला और अधिक से अधिक जितना संभव हो, उतना करें ।

ईश्वरप्राप्ति हेतु त्याग का महत्त्व !

तन-मन-धन का त्याग और सर्वस्व अर्पण करने की तैयारी द्वारा साधक के अहं का लय होने लगता है । उसका संचित और प्रारब्ध संमाप्त होता है । उसे ईश्वर की प्राप्ति होती है और उसका जीवन सार्थक होता है ।

महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में सनातन के ग्रंथों एवं सात्त्विक उत्पादों का अधिक से अधिक वितरण करें !

१५.२.२०२६ को महाशिवरात्रि है । इस उपलक्ष्य में हमें सनातन के ग्रंथ, लघुग्रंथ एवं सात्त्विक उत्पादों को अधिक से अधिक जिज्ञासुओं तक पहुंचाने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त हुआ है । इस अवसर का लाभ उठाकर साधक निम्नांकित ग्रंथ एवं प्रसारसामग्री के अधिकाधिक वितरण हेतु प्रयास करें ।