विजयादशमी के निमित्त सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी का संदेश !

सच्चा सीमोल्लंघन है, ‘विजय प्राप्त करने के लिए शत्रु की सीमा लांघकर युद्ध की चुनौती देना’, अपराजिता देवी की पूजा करने का अर्थ है, ‘विजय प्राप्त करने के लिए देवी से शक्ति मांगना’ तथा छोटे-बडों को अश्मंतक के पत्ते देने का अर्थ है ‘विजयश्री प्राप्त करने के लिए बडों का आशीर्वाद लेना’ !

सनातन संस्था की निर्दोषिता फिर से सिद्ध, ‘हिंदू आतंकवाद’ के षड्यंत्र का पर्दाफाश

सनातन संस्था को ‘आतंकवादी संगठन’ बताकर उस पर प्रतिबंध लगाने के लिए वर्ष 2011 में दायर की गई जनहित याचिका को अंततः याचिकाकर्ताओं को शर्मिंदगी के साथ वापस लेना पड़ा। 14 वर्षों तक चले इस लंबे न्यायिक संघर्ष में, याचिकाकर्ता सनातन संस्था के विरुद्ध आतंकवाद का एक भी सबूत पेश नहीं कर पाए।

मथुरा (उत्तर प्रदेश) में सनातन संस्था की ओर से श्राद्ध विषय पर प्रवचन और सामूहिक नामजप का आयोजन !

मथुरा (उत्तर प्रदेश ) के अशोका सिटी सोसाइटी में दिनांक 7.9.2025 को सनातन संस्था की ओर से श्राद्ध विषय पर प्रवचन और सामूहिक नामजप का आयोजन किया गया ।

भाद्रपद पूर्णिमा (७.९.२०२५) को लगनेवाला संपूर्ण चंद्रग्रहण !

रविवार, ७.९.२०२५ (भाद्रपद पूर्णिमा) को लगनेवाला संपूर्ण चंद्रग्रहण भारत में सर्वत्र दिखाई देगा । संपूर्ण चंद्रगहण को अंग्रेजी में Total lunar eclipse कहते हैं । चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन ही लगता है ।

देवपूजा

हिन्दू धर्म में सगुण उपासनापद्धति की नींव अर्थात ‘देवपूजा’ ! ‘नित्य की भागदौड के दिनक्रम में देवपूजा के लिए इतना समय किसे है ?’, ऐसी नकारात्मक मानसिकता आजकल काफी लोगों में पाई जाती है । केवल एक नित्यकर्म पूरा करना है इसलिए भगवान पर जल्दी-जल्दी पानी डालना है, चंदन का तिलक लगाना और फूल चढाकर उदबत्ती दिखाना, हो गई ‘देवपूजा ’!, ऐसा चित्र सर्वत्र दिखाई देता है । सभी के पालनपोषण का ध्यान रखनेवाले भगवान की पूजा इसप्रकार ‘निबटाना’, इसे देवपूजा कह सकते हैं क्या ? ऐसा करने पर भगवान हम पर क्यों कृपा करें

वास्तुशास्त्रानुसार घर में देवघर कैसे होना चाहिए ?

पूजाघर बनाते समय उसे सीधे भूमि पर न रखें । पूजाघर  संगमरमर अथवा लकडी से बना हो । कांच से बना हुआ पूजाघर टालें । पूजाघर कहां हैं, इसकी बजाय वहां पूजा नियमितरूप से और भावपूर्ण हो रही है ना, यह भी महत्वपूर्ण होता है ।

पूजा करते समय भाव कैसा रखें ?

देवता, संत अथवा गुरु को पोछते हुए वे वहां साक्षात हैं, ऐसा भाव रखें । उन्हें बताएं कि हम पोछने जा रहे हैं । तत्पश्चाच ऊपर से नीचे तक एक-एक अंग धीरे-धीरे पोछें । ठीक उसीप्रकार जैसे मां बच्चे को नहलाती है । वह बच्चे से बातें करते हुए कि अब मैं तुम्हें स्नान करवाने जा रही हूं । तुम अपनी आंखें बंद कर लो । इससे आंखों में पानी नहीं जाएगा । इसप्रकार उसका ध्यान रखते हुए स्नान करवाती है ।

दिल्ली के शहीद भाई बाल मुकुंद सर्वोदय विद्यालय में सनातन संस्था की ओर से नामजप का विद्यार्थी जीवन में महत्व विषय पर स

विद्यालय में सभी धर्मों के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। इसलिए, सभी धर्मों के अनुसार कौन सा नामजप करना चाहिए, यह भी समझाया गया। इस मार्गदर्शन का लाभ लगभग 200 से 220 विद्यार्थियों ने लिया।

मथुरा (उत्तर प्रदेश) के मंदिर प्रांगण में राधा जी की भक्ति पर सनातन संस्था की ओर से सत्संग

राधा जी के समान भक्ति हम अपने जीवन में कैसे उतारें इन विषयों पर मार्गदर्शन किया । इसका लाभ लगभग 100 जिज्ञासुओं ने लिया ।

धर्मसंस्थापक भगवान श्रीकृष्ण पर आक्षेप एवं उसका खंडन

‘अयोग्य टीका-टिप्पणियों का प्रतिवाद करना’, कालानुसार आवश्यक धर्मपालन ही है । इसी उद्देश्य से आगे ‘श्रीकृष्ण पर आक्षेप और उसका खंडन’ दिया है । प्रत्येक व्यक्ति का इसका अध्ययनपूर्वक मनन करना चाहिए ।