परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के मार्गदर्शनानुसार श्री गणेशमूर्ति बनाते समय मूर्तिकार साधक श्री गुरुदास खंडेपारकर को सीखने के लिए मिले सूत्र

गणेशजी की सात्त्विक मूर्ति बनाते समय परम पूज्य डॉक्टरजी मूर्तिनिर्माण के प्रत्येक चरण में अनेक सुधार बताते थे । तब, मुझे लगता था कि ये ठीक कह रहे हैं और इनके बताए अनुसार सुधार कर, मूर्ति बनानी चाहिए ।’ इसलिए, मूर्ति में अनेक सुधार करना पडा ।

‘सात्त्विक रंगोली’ ग्रंथ के माध्यम से ‘ईश्‍वरप्राप्ति के लिए कला’ इस ध्येय की ओर ले जानेवाले परात्पर गुरु डॉ. आठवले !

सनातन की साधिका कुमारी कुशावर्ता और संध्या माली ने कला विषय की शिक्षा प्राप्त की है । साधना में आने के पश्‍चात उन्हें परात्पर गुरु डॉ. आठवले जी की कृपा से ‘ईश्‍वरप्राप्ति के लिए कला’ इस ध्येय का ज्ञान हुआ । उन्हें सात्त्विक रंगोलियां अवगत होने की प्रक्रिया तथा परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी से इस विषय में मिला मार्गदर्शन के विषय में जानकारी आगे दे रहे हैं ।

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परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का आदर्श जीवन

प.पू. डॉक्टरजी की अलौकिकता का शब्दों में वर्णन करना असंभव है’, ऐसा महर्षि बताते हैं और साधकों ने प्रत्यक्ष में यह अनुभव भी किया है । मैं पिछले १६ वर्ष से प.पू. डॉक्टरजी के सान्निध्य में साधना कर रहा हूं । इस कालखंड में उनके संदर्भ में अनेक अनुभूतियां मुझे भी हुई हैं ।

योगतज्ञ दादाजी वैशंपायन

२५.७.२०१० को योगतज्ञ दादाजी वैशंपायन सत्कर्म सेवा सोसाइटी की ओर से परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी को सम्मानपत्र और पंद्रह सहस्र रुपए देकर योगतज्ञ दादाजी वैशंपायन गुणगौरव पुरस्कार प्रदान किया गया ।

गुरुकुल समान आश्रमोंका निर्माण !

साधकों को पूर्णकालीन साधना के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो, इसलिए परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने गुरुकुल समान आश्रमों की निर्मिति की है ।

विविध संतों द्वारा किया गया परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का सम्मान !

संत ही संतों को पहचान सकते हैं और वे ही अन्य संतों के कार्य का महत्त्व समझ सकते है । परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के आध्यात्मिक कार्य का महत्त्व ज्ञात होने से अनेक संतों ने परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी को सम्मानित एवं पुरस्कार देकर गौरवान्वित किया ।

बैसाखी

बैसाखी एक राष्ट्रीय त्योहार है । इस त्यौहार को उत्तर भारत में विशेषकर पंजाब एवं हरियाणा में मनाया जाता है। बैसाखी त्यौहार अप्रैल माह में तब मनाया जाता है, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। 

दीपावली मेले में सनातन भारतीय संस्कृति संस्था एवं सनातन संस्था द्वारा धर्मप्रसार !

फरीदाबाद (हरियाणा) के बडखल लेक, फाल्कन रेस्टोरेंट के परिसर में चार दिवसीय दीपावली मेले में सनातन भारतीय संस्कृति की ओर से सात्त्विक सामग्री की प्रदर्शनी लगाई ।

राधा कुंड

कार्तिक अष्टमी का ये पर्व यहां प्राचीन काल से मनाया जाता है । राधा कुंड से सम्बंधित प्रचलित कथा के अनुसार कंस ने भगवान श्रीकृष्ण का वध करने के लिए अरिष्टासुर नामक दैत्य को भेजा था ।