परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के विषय में जगद्गुरुपद के सन्तों के गौरवोद्गार !
प.पू. डॉ. आठवलेजी सत्त्वशील, त्यागी और महान पुरुष है । उनका कार्य आदि शंकराचार्यजी के कार्य समान है ! – पूर्वाम्नाय श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंदसरस्वती
प.पू. डॉ. आठवलेजी सत्त्वशील, त्यागी और महान पुरुष है । उनका कार्य आदि शंकराचार्यजी के कार्य समान है ! – पूर्वाम्नाय श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंदसरस्वती
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने किए महान कार्य का कारण है उनकी लगन, भक्ति और उन्हें प्राप्त हुए गुरु, संत एवं महर्षियाें के आशीर्वाद ।
१. वात्सल्यपूर्ण वाणी से अध्यात्म सिखानेवाले प.पू. दादा महाराज झुरळे ! वर्ष १९८३ में अध्यात्म में जिज्ञासा जागृत होने के पश्चात मैं अध्यात्म समझने के लिए अनेक सन्तों के पास जाता था । उनमें से एक थे प.पू. दादा महाराज झुरळे । उन्हें मैं दादा कहता था । मैं दादा के पास अध्यात्म सीखने के … Read more
सनातन को अनिष्ट शक्तियों से होनेवाले कष्ट और हिन्दू धर्म के प्रचार में उनके द्वारा उत्पन्न की जानेवाली बाधाएं दूर होने के लिए गुरुदेव डॉ. काटेस्वामीजी ने वर्ष २००४ से उनके देहत्याग तक जप, हवन, सप्तशतिपाठ आदि कर्म किए ।
संतों का कार्य आध्यात्मिक (पारलौकिक) स्तर का होने से लौकिक सम्मान एवं पुरस्कारों के प्रति उनमें कोई आसक्ति नहीं होती । अपितु मनोलय एवं अहं का लय होने से वे सामाजिक प्रतिष्ठा को प्राप्त करनेवाले सम्मान एवं पुरस्कार के परे जा चुके होते हैं । ऐसा होनेपर भी केवल संत ही संत की पहचान कर सकते हैं और उनको ही अन्य संतों के कार्य का महत्त्व समझ में आता है ।