आश्रम के रसोईघर का रूपांतर आदर्श अन्नपूर्णा कक्ष में करते समय परम पूज्य डॉक्टरजी का अथक परिश्रम और सब स्तरों पर सुनियोजन तथा फलोत्पत्ति बढाने हेतु मार्गदर्शन !

प.पू. डॉक्टरजी की अगणित विशेषताआें का संक्षिप्त वर्णन करना हो, तो कहना पडेगा कि वे एक ऐसा व्यक्तित्व हैं, जिसके प्रत्येक कार्य, विचार और निर्णय में सत्यं शिवं सुंदरम का संगम है और जो अवतारी देवत्व की अनुभूति देता है ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की कृपा से महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के संगीत विभाग की साधिका को हुई अनुभूतियां

संगीत, नाद-साधना है, स्वभावदोष और अहं जाने पर ही, चैतन्यदायी गायन हो पाएगा ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के गुरु एवं उनके कार्य के प्रेरणास्रोत परमपूज्य भक्तराज महाराज !

प.पू. भक्तराज महाराज ही परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के कार्य के प्रेरणास्रोत हैं । इस संदर्भ में शब्दों में कुछ व्यक्त करना अत्यंत कठिन है । प.पू. बाबा का परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के प्रति प्रेम तथा उनके कार्य को मिले प.पू. बाबा के आशीर्वाद सांसारिक अर्थों में समझ सकें, इसके लिए यहां दे रहे हैं ।

अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिके सम्मोहन-उपचार विशेषज्ञ परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी !

ग्रंथ, लोकप्रिय नियतकालिकों में प्रसिद्ध हुए परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी १२३ लेख और विदेश में गौरवान्वित शोध-निबंध उनके चिकित्सा क्षेत्र के सफल कार्यकाल की तथा सम्मोहन-उपचारों में अद्वितीय शोधकार्य के प्रति समर्पण की फलोत्पत्ति है ।

निर्माण-कार्य की सेवा करते समय डॉ. भोसले को परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी से सीखने के लिए मिले अनमोल सूत्र !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी प्रतिदिन सवेरे ७ बजे निर्माण-कार्य का निरीक्षण करने आते थे ।

प्रीति के अथाह सागर परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के विषय में साधक के मन में संग्रहित भावमोति !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी आरंभ में अध्यात्मप्रसार हेतु गोवा आते थे । उस समय गोवा में ५ स्थानों पर सार्वजनिक सभा का नियोजन था ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के मार्गदर्शनानुसार श्री गणेशमूर्ति बनाते समय मूर्तिकार साधक श्री गुरुदास खंडेपारकर को सीखने के लिए मिले सूत्र

गणेशजी की सात्त्विक मूर्ति बनाते समय परम पूज्य डॉक्टरजी मूर्तिनिर्माण के प्रत्येक चरण में अनेक सुधार बताते थे । तब, मुझे लगता था कि ये ठीक कह रहे हैं और इनके बताए अनुसार सुधार कर, मूर्ति बनानी चाहिए ।’ इसलिए, मूर्ति में अनेक सुधार करना पडा ।

‘सात्त्विक रंगोली’ ग्रंथ के माध्यम से ‘ईश्‍वरप्राप्ति के लिए कला’ इस ध्येय की ओर ले जानेवाले परात्पर गुरु डॉ. आठवले !

सनातन की साधिका कुमारी कुशावर्ता और संध्या माली ने कला विषय की शिक्षा प्राप्त की है । साधना में आने के पश्‍चात उन्हें परात्पर गुरु डॉ. आठवले जी की कृपा से ‘ईश्‍वरप्राप्ति के लिए कला’ इस ध्येय का ज्ञान हुआ । उन्हें सात्त्विक रंगोलियां अवगत होने की प्रक्रिया तथा परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी से इस विषय में मिला मार्गदर्शन के विषय में जानकारी आगे दे रहे हैं ।

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परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का आदर्श जीवन

प.पू. डॉक्टरजी की अलौकिकता का शब्दों में वर्णन करना असंभव है’, ऐसा महर्षि बताते हैं और साधकों ने प्रत्यक्ष में यह अनुभव भी किया है । मैं पिछले १६ वर्ष से प.पू. डॉक्टरजी के सान्निध्य में साधना कर रहा हूं । इस कालखंड में उनके संदर्भ में अनेक अनुभूतियां मुझे भी हुई हैं ।

गुरुकुल समान आश्रमोंका निर्माण !

साधकों को पूर्णकालीन साधना के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो, इसलिए परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने गुरुकुल समान आश्रमों की निर्मिति की है ।