बक्सों से प्रत्यक्ष सोते समय उपचार करने की विविध पद्धतियां

रात में अनिष्ट शक्तियां अधिक कष्ट देती हैं । इसलिए विकारग्रस्त व्यक्ति के लिए दिन के साथ-साथ रात में सोते समय भी बक्सों से उपचार करना आवश्यक होता है । विकाररहित व्यक्ति भी रात में सोते समय अपने लिए सुरक्षा-कवच बनाने हेतु बक्सों का उपयोग करेंगे, तो अच्छा रहेगा ।

हिन्दुत्वनिष्ठों के अभियोगों की सुनवाई को जानबूझकर लंबित रखनेवाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही हो ! – परेश गुजराथी, सनातन संस्था

शबरीमला मंदिर की धर्मपरंपराओं की रक्षा हेतु केंद्र सरकार संसद में कानून बनाए, आंदोनकारी भक्तों के विरुद्ध प्रविष्ट अपराध तुरंत वापस लिए जाएं तथा अन्य भी कुछ मांगों को लेकर हिन्दुत्वनिष्ठो ने राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन के माध्यम से यहां के जयस्तंभ के पास प्रदर्शन किया ।

‘घरेलु औषधि’ सेवन की पद्धतियां !

विशेषज्ञ वैद्य ही ऐसी चिकित्सा कर सकते हैं । विशेषज्ञ वैद्य के अभाव में न्यूनतम रोगी को आराम मिले, इसके लिए परंपरागत घरैलु औषधियों की बहुत अच्छी सुविधा उपलब्ध की गई है ।

शारदीय ऋतुचर्या : शरद ऋतु में स्वस्थ्य रहने हेतु आयुर्वेदीय चिकित्सा !

वर्षाऋतु समाप्त होते-होते सूर्य की प्रखर किरणें धरती पर पडने लगती हैं । तब शरद ऋतु का आरंभ होता है ।

शास्त्रों के अनुसार श्राद्धकर्म न करने से होनेवाली हानि

हिन्दू धर्मशास्त्र के अनुसार मृत व्यक्ति के श्राद्धविधि प्रतिवर्ष करने के लिए कहा गया है । कुछ निरीश्‍वरवादी इसे विरोध करते हैं । श्राद्ध-विधि न करने पर क्या हो सकता है और जीवन में साधना का महत्त्व इस लेख द्वारा समझ लेते है ।

अविधवा नवमी

पति के निधन से पूर्व मृत स्त्रियों के श्राद्ध पितृपक्ष की नवमी को (अविधवा नवमी को) ही क्यों करें ?

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा लेखापरीक्षक वरदाराज बापट की सनातन के रामनाथी आश्रम को सदिच्छा भेंट !

खिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा नौपाडा, ठाणे के लेखापरीक्षक श्री. वरदराज बापट ने हाल ही में सनातन के रामनाथी आश्रम का अवलोकन किया ।

रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में संत भक्तराज महाराज तथा प.पू. रामानंद महाराज की चरण पादुकाओं का दर्शन समारोह संपन्न

चरणपादुकाओं के पूजन के पश्‍चात श्री. शरद बापट ने परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी को शॉल, कमलपुष्प तथा अंग्रेजी भाषा का‘प.पू. भक्तराज महाराजजी का दैवीय जीवनपट’ ग्रंथ समर्पित कर सम्मानित किया ।