‘भूतकाल के स्मरण में न रमते हुए, उससे सकारात्मक ऊर्जा लेकर हमें वर्तमानकाल में रहना है । ऐसा करने से अपनी भावना समाप्त हो जाती हैं । अन्यथा वे हमें माया में फंसा देती हैं । भावजागृति के प्रयत्न करना, यह अपनी भावनाओं को समाप्त करने का उत्तम साधन है ।’
– श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ
ज्ञानप्राप्ति के संदर्भ में भक्तिमार्ग का महत्त्व
‘सब कुछ भगवान ही करते हैं’, यह भाव होगा, तो कुछ भी करते समय और...
सत्सेवा का महत्त्व