सत्सेवा का महत्त्व

अ. ‘सेवा से चित्त पर संस्कार शीघ्र अल्प होते हैं और मन भी निर्विचार होता है । इसलिए नाम के परे जाना शीघ्र संभव होता है ।

आ. साधना करते समय प्रत्येक बात का अर्थ लगाने में समय न गंवाएं । कृति कर अनुभव से सीखकर शीघ्र आगे जाएं । इससे बुद्धि की बाधा दूर होगी और अध्यात्म में शीघ्र प्रगति होती है !’

– श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ

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