अ. ‘सेवा से चित्त पर संस्कार शीघ्र अल्प होते हैं और मन भी निर्विचार होता है । इसलिए नाम के परे जाना शीघ्र संभव होता है ।
आ. साधना करते समय प्रत्येक बात का अर्थ लगाने में समय न गंवाएं । कृति कर अनुभव से सीखकर शीघ्र आगे जाएं । इससे बुद्धि की बाधा दूर होगी और अध्यात्म में शीघ्र प्रगति होती है !’
– श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ
भावजागृति के प्रयत्न करना, यह अपनी भावनाओं का समाप्त करने का उत्तम साधन !
ज्ञानप्राप्ति के संदर्भ में भक्तिमार्ग का महत्त्व