‘भक्तिभाव से ज्ञानप्राप्ति करने पर उसका अहं नहीं लगता; परंतु ज्ञानमार्ग के ज्ञानप्राप्ति में अहं निर्माण होने की अत्यधिक संभावना होती है; इसलिए नित्य भावजागृति के प्रयत्न अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं । भक्तिके कारण ज्ञान में मिठास निर्माण होती है, अन्यथा केवल ज्ञान की इच्छा से प्राप्त ज्ञान नीरस लगता है ।’
– श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ
भावजागृति के प्रयत्न करना, यह अपनी भावनाओं का समाप्त करने का उत्तम साधन !
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