‘कोई बात मैं नहीं करता; तो उसे दूसरों को करने के लिए कैसे कहूं ?’, ऐसा विचार न करें । जब तुम कोई अच्छी बात अथवा चूक ध्यान में आनें- पर सहायता के रूप में दूसरों को तुरंत बताते हैं, तब आपकी लगन के कारण आप पर भी उसका परिणाम होता है ।’
– श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ
भावजागृति के प्रयत्न करना, यह अपनी भावनाओं का समाप्त करने का उत्तम साधन !
ज्ञानप्राप्ति के संदर्भ में भक्तिमार्ग का महत्त्व
सत्सेवा का महत्त्व