वैराग्य क्या है ?

सेवा करते समय व्यक्ति की अपेक्षा तत्त्व देखना, यही वैराग्य है । व्यक्तिनिष्ठता छोडकर तत्त्वनिष्ठा जपना, अर्थात वैराग्य स्वयं में लाना है । प्रत्येक बात में भगवान को देखना, यही खरा वैराग्य है !

– श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ

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