केवल अध्ययन से उत्कर्ष नहीं होता, अपितु साधना से खरा उत्कर्ष होता है !

‘साधना द्वारा मनोलय एवं बुद्धि का लय हो गया तो ईश्‍वर जो भी आवश्यक है वह देता है । इसलिए अनावश्यक वाचन करने में अपना समय नहीं जाता । जगत में अनावश्यक वाचन करनेवाले अभ्यासक अनेक हैं; परंतु साधना कर ईश्‍वरप्राप्ति करनेवाले गिने-चुने हैं । केवल अभ्यास से उत्कर्ष नहीं होता, अपितु साधना से होता है !

– श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ

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