‘कलियुग में साधना करनेवाले व्यक्ति मिलना कठिन है और साधना करनेवाले साधक मिलना उससे भी अधिक कठिन है । किसी परिवार में एक साधक साधना में होगा, तब वह साधक और उसका परिवार बहुत पुण्यवान है । उस पुण्य को कृतज्ञतापूर्वक नमस्कार करने के लिए हमें उन साधकों से मिलना पडता है ।’
-श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ
भावजागृति के प्रयत्न करना, यह अपनी भावनाओं का समाप्त करने का उत्तम साधन !
ज्ञानप्राप्ति के संदर्भ में भक्तिमार्ग का महत्त्व
सत्सेवा का महत्त्व