साधना का चैतन्य !

हम अपने व्यक्तित्व के कारण औरों के ध्यान में नहीं रहते, अपितु साधना के चैतन्य के कारण ध्यान में रहते हैं !

– श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ

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