अध्यात्मशास्त्र एक अंतहीन सागर समान अमर्यादित है । जितना भी हम अध्यात्म में सीखें, वह अल्प ही है । सीखने के लिए अनेक जन्म भी अपर्याप्त हैं । इसलिए अध्यात्म का बुद्धि से अध्ययन करने की अपेक्षा तत्त्व समझकर उसका शास्त्र समझना आवश्यक है ।
अध्यात्मशास्त्र एक अंतहीन सागर समान अमर्यादित है । जितना भी हम अध्यात्म में सीखें, वह अल्प ही है । सीखने के लिए अनेक जन्म भी अपर्याप्त हैं । इसलिए अध्यात्म का बुद्धि से अध्ययन करने की अपेक्षा तत्त्व समझकर उसका शास्त्र समझना आवश्यक है ।