काल (समय) हमें अध्यात्म सिखानेवाला उत्तम शिक्षक है । वह हमारे लिए परिस्थिति, परिणाम, प्रारब्ध के कारण आनेवाले सुखद-दुःखद प्रसंग लेकर आता रहता है । यदि हमने काल (समय) को ही ईश्वर समझकर स्वीकार लिया, तो जीवन में आए दिन ही होनेवाली घटनाओं का कुछ भी नहीं लगता । इस प्रकार हम अपने प्रारब्ध पर सहजता से विजय प्राप्त कर सकते हैं ।
भावजागृति के प्रयत्न करना, यह अपनी भावनाओं का समाप्त करने का उत्तम साधन !
ज्ञानप्राप्ति के संदर्भ में भक्तिमार्ग का महत्त्व
सत्सेवा का महत्त्व