वास्तविक देवतापूजन

सेवा करते समय कोई चूक होने पर उसके लिए तुरंत ही क्षमायाचना करना, प्रायश्चित्त लेना और वह चूक पुन: न होने हेतु लगन से प्रयत्न करना’, यही खरी ‘ईश्वरपूजा’ है ।

– श्रीचित्‌‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळ (२८.४.२०२०)

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