अन्यों से पूछकर कृत्य करने से भगवान प्रसन्न होकर वे कठिन परिस्थिति में भी साधकों का पालन-पोषण करते हैं !

काल की गति को समझकर किया गया वर्तमानकालीन कर्म उस जीव के उद्धार के लिए प्रमाण सिद्ध होता है; इसलिए परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने पहले ही ‘काल के अनुसार साधना’, यह वचन बता दिया है । कभी भी कुछ भी नहीं करना चाहिए । प्रत्येक बार उन्नत पुरुषों से पूछकर ही कर्म करना चाहिए । इस गुण पर प्रसन्न होकर भगवान कठिन परिस्थिति में भी हमारा पालन-पोषण करते हैं ।

– श्रीचित्‌शक्ति् (श्रीमती) अंजली गाडगीळ

Leave a Comment