स्वयं में विद्यमान दैवी गुणों को पहचानकर उसके अनुसार प्रयास करने चाहिए !

प्रत्येक व्यक्ति में भगवान के द्वारा ऐसा एक उत्तम गुण प्रदान किया गया होता है, जिसका उचित उपयोग करने से उसकी सेवा और साधना की फलोत्पत्ति बढती है । ‘वह गुण कौनसा है ?, इसका स्वयं चिंतन कर और उसके लिए अन्यों से सहायता लेकर पहचानना चाहिए और उसका उचित उपयोग कर उसके लिए तीव्रगति से प्रयास करने चाहिए ।

– श्रीचित्‌शक्ति् (श्रीमती) अंजली गाडगीळ

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