सनातन संस्था > Quotes > संताें की सीख > आध्यात्मिक > स्वभावदोष एवं अहं निर्मूलन का महत्त्व ! स्वभावदोष एवं अहं निर्मूलन का महत्त्व ! Share this on : ‘ईश्वर में स्वभावदोष एवं अहं नहीं होता । उनसे एकरूप होना हो, तो हममें भी उनका अभाव आवश्यक है ।’ – (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले Share this on : संबंधित लेख विज्ञान के प्रयोग में त्रुटि हो सकती है; किन्तु अध्यात्म का कोई भी प्रयोग न...मनुष्य जन्म में साधना करने का महत्त्ववास्तविक देवतापूजनजीवन में चिरंतन जागृति का महत्त्वबाह्य नातों में फंसने की अपेक्षा आंतरिक नाते से मनुष्य में विद्यमान भगवान को निकट...अन्यों से पूछकर कृत्य करने से भगवान प्रसन्न होकर वे कठिन परिस्थिति में भी साधकों...