‘कुछ लोग प्रश्न करते हैं कि हिन्दू (ईश्वरीय) राष्ट्र की शिक्षा प्रणाली कैसी होगी ?’, उसका उत्तर है , ‘नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालयों में जिस प्रकार १४ विद्या और ६४ कला सिखाते थे, उस प्रकार की शिक्षा दी जाएगी; परंतु उन माध्यमों से ईश्वरप्राप्ति करना भी सिखाया जाएगा ।’
-(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले
विज्ञान के प्रयोग में त्रुटि हो सकती है; किन्तु अध्यात्म का कोई भी प्रयोग न...
मनुष्य जन्म में साधना करने का महत्त्व
वास्तविक देवतापूजन