‘बुद्धिवादियों को इस बात का अहंकार होता है कि, ‘मानव ने भिन्न भिन्न प्रकार के यंत्रों का आविष्कार किया है ।’ उनके ध्यान में यह नहीं आता कि ईश्वर ने जिवाणु, पशु, पक्षी, 70-80 वर्ष चलने वाला यंत्र अर्थात मानव देह जैसी अरबों वस्तुएं बनाई हैं । क्या इनमें से एक भी वस्तु वैज्ञानिक बना पाए हैं ?’
-(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले
भावजागृति के प्रयत्न करना, यह अपनी भावनाओं का समाप्त करने का उत्तम साधन !
ज्ञानप्राप्ति के संदर्भ में भक्तिमार्ग का महत्त्व
सत्सेवा का महत्त्व