‘साधना करने से कुण्डलिनी शक्ति जागृत होती है । यह अबतक के युगों में लाखों साधकों ने अनुभव किया है; पर जिन्हें साधना पर विश्वास ही नहीं है ऐसे बुद्धिवादी साधना न करते हुए भी बोलते हैं कि, ‘ कुण्डलिनी दिखाओ, नहीं तो वह नहीं है ।’
-(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले
भावजागृति के प्रयत्न करना, यह अपनी भावनाओं का समाप्त करने का उत्तम साधन !
ज्ञानप्राप्ति के संदर्भ में भक्तिमार्ग का महत्त्व
सत्सेवा का महत्त्व