आदर्श विवाहपत्रिका : विवाहपत्रिका सात्त्विक होने के लिए क्या करना चाहिए ?

विवाहपत्रिका आजकल प्रतिष्ठा का विषय बन गया है । अनेक पृष्ठों की, सुगंधित, मंहगी पत्रिकाओं को छापने की ओर समाज का झुकाव बढ गया है । ‘विवाह’ एक धार्मिक विधि होने से विवाहपत्रिका सात्त्विक हो और उससे धर्मप्रसार हो, इसके लिए प्रयास करना चाहिए । इस दृष्टि से विवाहपत्रिका के विविध घटक कैसे हाेने चाहिए, इसका विवेचन आगे किया है ।

देवपूजा

हिन्दू धर्म में सगुण उपासनापद्धति की नींव अर्थात ‘देवपूजा’ ! ‘नित्य की भागदौड के दिनक्रम में देवपूजा के लिए इतना समय किसे है ?’, ऐसी नकारात्मक मानसिकता आजकल काफी लोगों में पाई जाती है । केवल एक नित्यकर्म पूरा करना है इसलिए भगवान पर जल्दी-जल्दी पानी डालना है, चंदन का तिलक लगाना और फूल चढाकर उदबत्ती दिखाना, हो गई ‘देवपूजा ’!, ऐसा चित्र सर्वत्र दिखाई देता है । सभी के पालनपोषण का ध्यान रखनेवाले भगवान की पूजा इसप्रकार ‘निबटाना’, इसे देवपूजा कह सकते हैं क्या ? ऐसा करने पर भगवान हम पर क्यों कृपा करें

वास्तुशास्त्रानुसार घर में देवघर कैसे होना चाहिए ?

पूजाघर बनाते समय उसे सीधे भूमि पर न रखें । पूजाघर  संगमरमर अथवा लकडी से बना हो । कांच से बना हुआ पूजाघर टालें । पूजाघर कहां हैं, इसकी बजाय वहां पूजा नियमितरूप से और भावपूर्ण हो रही है ना, यह भी महत्वपूर्ण होता है ।

पूजा करते समय भाव कैसा रखें ?

देवता, संत अथवा गुरु को पोछते हुए वे वहां साक्षात हैं, ऐसा भाव रखें । उन्हें बताएं कि हम पोछने जा रहे हैं । तत्पश्चाच ऊपर से नीचे तक एक-एक अंग धीरे-धीरे पोछें । ठीक उसीप्रकार जैसे मां बच्चे को नहलाती है । वह बच्चे से बातें करते हुए कि अब मैं तुम्हें स्नान करवाने जा रही हूं । तुम अपनी आंखें बंद कर लो । इससे आंखों में पानी नहीं जाएगा । इसप्रकार उसका ध्यान रखते हुए स्नान करवाती है ।

ईश्वरप्राप्ति हेतु विवाहविधि अध्यात्मशास्त्र के अनुरूप ही करें !

विवाहविधि द्वारा वधु-वर सहित उपस्थितों का आनंदप्राप्ति की दिशा में मार्गक्रमण होने के लिए कैसे प्रयत्न करने चाहिए, वह इस लेख में प्रस्तुत है ।

दीपज्योति नमोस्तुते

पुरातन काल से ही दीप को सर्वत्र आदर एवं श्रद्धा का स्थान है । आज भले ही बिजली के आधुनिक उपकरणों से सर्वत्र रोशनाई की जगमगाहट होती हो; परंतु जो तेज दीप में है, वह उस कृत्रिम जगमगाहट में तनिक भी नहीं होता ।

विवाह निश्‍चित करते समय वधु-वर की जन्मकुंडली मिलाने का महत्त्व

वधु-वर की जन्मकुंडलियां मिलाने का महत्त्व, इसके साथ ही  वैवाहिक जीवन आनंदमय होने के लिए क्या करना चाहिए, इस विषय में प्रस्तुत लेख !

देवघर में देवताओं की रचना कैसे करनी चाहिए ?

पूजाघर में कुलदेवता, श्री गणपति, कुलाचार के अनुसार बालगोपाल, हनुमान एवं श्री अन्नपूर्णा रखें । इनके अतिरिक्त अन्य देवता जैसे शिव, दुर्गा समान किसी उच्चदेवता की उपासना करते हों, तो वह रखें ।

आरती कैसे करें ?

भक्तिभाव वृद्धिंगत करनेवाला प्रभावी माध्यम-आरती । आरती, इस कलियुग में ईश्वर के दर्शन करने का सरल उपाय है; कारण यह कि कलियुग में ‘क्या भगवान..

ईश्वर से प्रार्थना करनेके विविध उदाहरण !

देवद, पनवेल के सनातन आश्रम में रहकर सेवा करनेवाले श्री. भालचंद्र जोशी को सूझी प्रार्थनाएं इस लेख में प्रस्तुत कर रहे हैं !