आपातकाल में महाशिवरात्रि कैसे मनाएं ?

‘संपूर्ण देश में महाशिवरात्रि बडे उत्‍साह से मनाई जाती है । फाल्‍गुन कृष्‍ण पक्ष चतुर्दशी को शिवजी का व्रत महाशिवरात्रि करते हैं । (इस वर्ष ११ मार्च २०२१ को महाशिवरात्रि है ।) उपवास, पूजा और जागरण महाशिवरात्रि व्रत के ३ अंग हैं ।

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आयुर्वेद के नियमों का पालन करें !

शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् । अर्थात, धर्माचरण के लिए (साधना करने के लिए) शरीर का स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है ।

कैसे मनाई जाती है देश-विदेश में मकर संक्रांति ?

मकर संक्रांति पूरे भारत में विविध नामों से मनाया जाता है । छत्तीसगढ, गोवा, ओडिशा, बिहार, झारखण्‍ड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, मध्‍यप्रदेश, महाराष्‍ट्र, मणिपुर, राजस्‍थान, सिक्‍किम, उत्तर प्रदेश, पश्‍चिम बंगाल, गुजरात और जम्‍मू आदी राज्‍यों में यह उत्‍सव मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है ।

वैवाहिक जीवन आनंदमय होने के लिए क्या करना चाहिए ?

विवाह के कारण परिवारव्यवस्था से उत्पन्न बच्चों को सुसंस्कार, प्रेम एवं सुरक्षा मिलती है । किंतु, व्यभिचार से उत्पन्न संतति, इन सबसे वंचित रहती है ।

कोरोना महामारी के कारण उत्‍पन्‍न आपातकालीन स्‍थिति में दीपावली कैसे मनाएं ?

कोरोना महामारी की पृष्‍ठभूमि पर लागू की गई संचार बंदी यद्यपि उठाई जा रही है तथा जनजीवन पूर्ववत हो रहा है, तथापि कुछ स्‍थानों पर सार्वजनिक प्रतिबंधों के कारण सदैव की भांति दीपावली मनाना संभव नहीं हो पा रहा है । ऐसे स्‍थानों पर दीपावली कैसे मनाएं, इससे संबंधित कुछ उपयुक्‍त सूत्र और दृष्‍टिकोण यहां दे रहे हैं ।

दीपावली का वैश्विक स्वरूप !

नौकरी-व्‍यवसाय के उपलक्ष्य में पूरे विश्‍व में फैले भारतीय लोगों ने दीपावली के त्‍योहार को पूरे विश्‍व में प्रसारित कर दिया है । अन्‍य राष्‍ट्रों में दीपावली का त्‍योहार कैसे मनाया जाता है और उसे मनाते समय भारत की अपेक्षा उनमें क्‍या अलग होता है, इस लेख से हम इसे जानेंगे ।

भोजन बनाते समय विविध कृतियों में कैसा भाव रखें ?

कहते हैं ‘जैसा अन्न, वैसा मन’। अर्थात भोजन बनाते समय हमारे मन में जैसा भाव होगा, वैसा ही भाव खानेवाले के मन में भी निर्माण होता है । यदि हम भावपूर्ण भोजन बनाएंगे, तो वह भोजन प्रसाद स्वरूप होगा । इसलिए अब हम अपनी रसोई बनाते समय कैसा भाव रखेंगे, यह देखते हैं ।

कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न आपातकालीन स्थिति में नवरात्रोत्सव कैसे मनाना चाहिए ?

कोरोना महामारी की पृष्ठभूमि पर लागू की गई यातायात बंदी, साथ ही अन्य प्रतिबंधों के कारण कुछ स्थानों पर सामान्य की भांति नवरात्रोत्सव मनाने पर मर्यादाएं आनेवाली हैं ।

नमस्कार की योग्य पद्धति तथा उसका शास्त्र

दोनों हाथों के तलुवे एक-दूसरे के साथ जोडकर दोनों हाथों के अंगूठों का स्पर्श भ्रूमध्य के स्थान पर अर्थात दोनों भौवों के मध्य में करें ।