लक्ष्मीदेवीतत्त्व आकर्षित करनेवाली रंगोलियां

मंगलवार, शुक्रवार, कोजागरी पूर्णिमा, धनत्रयोदशी, यमदीपदान, देवदीपावली एवं श्री लक्ष्मीपूजनके शुभ प्रसंगमें लक्ष्मीतत्त्व की रंगोलियां बनाएं ।

श्री दुर्गादेवीतत्त्व आकर्षित करनेवाली सात्त्विक रंगोलियां

विशेषकर मंगलवार एवं शुक्रवारके दिन देवीपूजनसे पूर्व तथा नवरात्रिकी कालावधिमें घर अथवा देवालयोंमें देवीतत्त्व आकृष्ट  एवं प्रक्षेपित करनेवाली सात्त्विक रंगोलियां बनाएं ।

पितृपक्ष एवं श्राद्ध के संदर्भ में किया जानेवाला दुष्प्रचार तथा उसका खण्डन

तथाकथित आधुनिकतावादी गिरोह हिन्दुओं के अन्य त्योहारों के भांति श्राद्धपक्ष के संदर्भ में भी हिन्दुओं का बुद्धिभ्रम करने का प्रयास कर हिन्दुओं को धर्माचरण से परावृत्त करने का प्रयास करते हैं ।

स्त्री अथवा पुरुष संतों का सम्मान (सत्कार) करने की योग्य पद्धति

जो गुरुपदपर आसीन हो और जिसका अहं अल्प हो वह जीव ईश्वर को भी परमप्रिय होता है । ऐसा जीव ही संपूर्ण मानवजाति की दृष्टि से सम्माननीय होता है ।

सत्कार कैसे करें ?

सत्कारमूर्तियों को चंदन का तिलक, कुमकुम-तिलक अथवा हलदी-कुमकुम (स्त्री हो तो हलदी-कुमकुम) लगाएं । चंदन का तिलक / कुमकुम-तिलक लगाने के लिए एक छोटी कटोरी में चंदन पाउडर अथवा कुमकुम थोडासा गीला करके रखें, तथा सत्कारमूर्तियों में स्त्री हो, तो हलदी-कुमकुम की कटोरियां रखें ।

Rest in peace (RIP) का वास्तविक अर्थ जान लें !

REST IN PEACE का अर्थ ‘शांति से लेटिए !’ ‘हे मृतात्मा, हमने तुम्हारे शरीर को भूमि में दफनाया है । अब कयामत के दिन उपरवाला तुम्हारे साथ न्याय करेगा; इसलिए अब तुम इस भूमि में शांति से लेटकर कयामत के दिन की प्रतिक्षा करो !’’

नागों का आध्यात्मिक महत्त्व एवं नागपंचमी

कलियुग के आरंभतक विविध स्थानों के देवताओं के लिए स्वतंत्र स्थान दिया जाता था, उदा. स्थानदेवता, ग्रामदेवता, क्षेत्रपालदेवता इत्यादि । उसी प्रकार से भारत के प्रत्येक गांव में नागों को रहने के लिए नागवन थे ।

दीप अमावस्या को नाली अमावस्या कहकर टोकनेवाले धर्मद्रोही विचारों का खण्डन !

हिन्दू इस त्योहार के प्रति लोगों में जागृति लाकर आज इस त्योहार को जो विकृत स्वरूप प्राप्त हुआ है, उसे रोकने हेतु प्रयास करें । हिन्दुओं को इस माध्यम से हमारे त्योहार और संस्कृति का सम्मान करने हेतु संगठित होना चाहिए ।

गणेशतत्त्व आकर्षित करनेवाली रंगोलियां

नित्य उपासना में भाव अथवा सगुण तत्वकी, तथापि गणेशाेत्सव में आनंद अथवा निर्गुण तत्त्वकी रंगोलियां बनाएं ।