‘वस्त्र (पोषाक) आरामदायी है’, ऐसा ऊपरी-ऊपर विचार कर तमोगुण बढानेवाला जीन्स पैंट परिधान करने के स्थान पर सात्त्विकता बढानेवाली वेशभूषा परिधान करना सर्व दृष्टि से अधिक लाभदायी !

‘जैसा देश वैसा वेश’ ऐसी कहावत है । आज अपना पहनावा ‘फैशन’पर आधारित होता है । कभी-कभार परिवर्तन के लिए किया जानेवाला ‘फैशन’ही यदि प्रतिदिन की पसंद बन जाए, तो स्वास्थ्य समास्याएं कितनी भीषण हो जाती हैं, इसका उदाहरण है जीन्स

सोते समय शरीर की स्थिति कैसी हो ?

निद्रा का उद्देश्य होता है शरीर को विश्राम मिले । इस दृष्टि से ‘जिस स्थिति में शरीर को सबसे अधिक आराम मिले, निद्रा की वही स्थिति अच्छी’, यह सामान्य नियम है ।

विवाह निश्‍चित करते समय वधु-वर की जन्मकुंडली मिलाने का महत्त्व

वधु-वर की जन्मकुंडलियां मिलाने का महत्त्व, इसके साथ ही  वैवाहिक जीवन आनंदमय होने के लिए क्या करना चाहिए, इस विषय में प्रस्तुत लेख !

उपवास

‘विविध उपवास भारतीय संस्कृति की विशेषताएं हैं । इन उपवासों में साधु-संतों के, ऋषि-मुनियों के आशीर्वाद होने से उपासकों को दैवीय तेज प्राप्त होता है ।

निरोगी शरीर के लिए परिहार के विरुद्ध आहार लेना टालें !

‘आयुर्वेदीय आहारमंत्र’ नामक मेरी इस पुस्तक में भोजनविधि की विस्तृत जानकारी दी है । भूख लगनेपर हाथ स्वच्छ धोकर उष्ण, ताजे, स्निग्ध पदार्थ एकाग्रचित्त से एवं पेट में थोडी जगह रखकर खाएं, ऐसे कुछ नियम हैं । ढाबे पर बैठकर लिया गया आहार ‘विधिविरुद्ध आहार’ है ।

विजयादशमी का संदेश

विजयादशमी’ हिन्दुओं के देवता और महापुरुषों की विजय का दिन है । ‘आसुरी शक्तियों का पराभव और दैवी शक्तियों की विजय’, यह इस दिन का इतिहास है । इसीलिए इस दिन अपराजितापूजन और सीमोल्लंघन करने की सनातन परंपरा है ।

शक्तिदेवता !

इस वर्ष की नवरात्रि के उपलक्ष्य में हम देवी के इन ९ रूपों की महिमा समझ लेते हैं । यह व्रत आदिशक्ति की उपासना ही है !

श्राद्ध में भोजन परोसने की पद्धति

‘पितरों के लिए थाली में सदैव उलटी दिशा में अन्न पदार्थ परोसने से रज-तमात्मक तरंगें उत्पन्न होकर मृत आत्मा के लिए अन्न ग्रहण करना संभव होता है ।’

नींद कब और कितनी लें ?

आजकल रात में देर से भोजन करने एवं सोने की पद्धति सर्वत्र प्रचलित हो गई है । इसलिए अधिकांश लोगों के लिए शीघ्र उठना संभव नहीं होता । रात में देर से खाना एवं सवेरे देर से उठना, यह अनेक रोगों को आमंत्रण देनेवाला है ।

नागपंचमी : सब्जी काटना, तलना, चूल्हे पर तवा रखना, भूमि जोतना अथवा भूमिखनन न करने का आधारभूतशास्त्र

नागपंचमी के दिन सब्जी काटना, चीरना, तलना, भूमि जोतना अथवा भूमिखनन इत्यादि कृत्य निषिद्ध हैं; परंतु वर्ष भर में अन्य दिन ये कृतियां करने में कोई बंधन नहीं । नागपंचमी के दिन निषिद्ध कृति न करने का आधारभूत शास्त्र एवं वैसा करने से होनेवाली हानि इस विषय पर विवेचन इस लेख में किया है ।