विपरीत आहार के प्रकार

कुछ व्‍यक्‍तियों के लिए देश, काल, अग्नि, प्रकृति, दोष, आयु इत्यादि का विचार करने पर कुछ अन्नपदार्थ हानिकारक सिद्ध होते हैं । ऐसे खाद्य पदार्थ विपरीत आहार में समाविष्‍ट होते हैं ।

नवसंवत्‍सर निमित्त संदेश

‘चैत्र-प्रतिपदा (गुडीपडवा) पृथ्वी पर युग के आरंभ का दिन है ! साढे तीन मुहूर्तों में एक, आज के दिन, नए कार्य का शुभारंभ किया जाता है । वर्तमान में, भारत में, धर्मनिरपेक्ष राज्य होने के कारण हमें सर्वत्र धर्मग्लानि का अनुभव हो रहा है ।

ब्रह्मध्वजा पर रखे जानेवाले तांबे के कलश का महत्त्व !

आजकल ऐसा देखने को मिलता है कि कुछ लोग ब्रह्मध्‍वजा पर स्‍टील या तांबे का लोटा अथवा घडे के आकारवाला बरतन रखते हैं । धर्मशास्‍त्र के अनुसार ‘ब्रह्मध्‍वजा पर तांबे का कलश उल्‍टा रखने का अध्‍यात्‍मशास्‍त्रीय विवेचन यहां दे रहे हैं । इससे हमारी संस्‍कृति का महत्त्व तथा प्रत्‍येक कृत्‍य धर्मशास्‍त्र के अनुसार करने का महत्त्व समझ में आता है !

आपातकाल में महाशिवरात्रि कैसे मनाएं ?

‘संपूर्ण देश में महाशिवरात्रि बडे उत्‍साह से मनाई जाती है । फाल्‍गुन कृष्‍ण पक्ष चतुर्दशी को शिवजी का व्रत महाशिवरात्रि करते हैं । (इस वर्ष ११ मार्च २०२१ को महाशिवरात्रि है ।) उपवास, पूजा और जागरण महाशिवरात्रि व्रत के ३ अंग हैं ।

पानी की शक्ति पहचानकर उसका पूर्ण उपयोग करें !

हमारे तीर्थक्षेत्र अथवा नदियों के कुंड अथवा देवालय में दिया जानेवाला तीर्थ अथवा भोजन से पूर्व पानी से ५ बार ली जानेवाली अपोष्णी आदि सब कुछ हिन्दू संस्कृति ने प्राचीन काल से पानी की असीमित और जीवित शक्ति के अध्ययन से ही हम तक पानी का महत्त्व और लाभ पहुंचाने के लिए तैयार किए हैं ।

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आयुर्वेद के नियमों का पालन करें !

शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् । अर्थात, धर्माचरण के लिए (साधना करने के लिए) शरीर का स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है ।

कैसे मनाई जाती है देश-विदेश में मकर संक्रांति ?

मकर संक्रांति पूरे भारत में विविध नामों से मनाया जाता है । छत्तीसगढ, गोवा, ओडिशा, बिहार, झारखण्‍ड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, मध्‍यप्रदेश, महाराष्‍ट्र, मणिपुर, राजस्‍थान, सिक्‍किम, उत्तर प्रदेश, पश्‍चिम बंगाल, गुजरात और जम्‍मू आदी राज्‍यों में यह उत्‍सव मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है ।

धनुर्मास की महिमा

१६.१२.२०२० से १३.१.२०२१ तक धनुर्मास था । इस मास के पांच गुरुवार और शुक्रवार अत्यंत महत्त्वपूर्ण होते हैं । चंद्र की संक्रांति की अधिकतावाले इस मास में भगवान की आराधना, भगवान का नामजप, भागवत कथा श्रवण, व्रत, दान, दीपदान, सत्संग और निष्काम कर्म करने का विशेष माहात्म्य है । इस मास में आनेवाली एकादशी को ‘वैकुंठ एकादशी’ कहते हैं । धनुर्मास में इस दिन को सर्वाधिक महत्त्व होता है ।

वैवाहिक जीवन आनंदमय होने के लिए क्या करना चाहिए ?

विवाह के कारण परिवारव्यवस्था से उत्पन्न बच्चों को सुसंस्कार, प्रेम एवं सुरक्षा मिलती है । किंतु, व्यभिचार से उत्पन्न संतति, इन सबसे वंचित रहती है ।