यज्ञयाग का मनुष्य एवं पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पडता है ! – शोध के निष्कर्ष

हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि यज्ञयाग से मनुष्य का तनाव अल्प होने के साथ-साथ वातावरण के प्रदूषण का स्तर भी न्यून होता है ।

विश्‍वयुद्ध, भूकंप इत्‍यादि विपत्तियों का प्रत्‍यक्ष सामना कैसे करें ? (भाग १)

अणुबम अर्थात क्‍या ?, उसकी तीव्रता कैसी होती है ?, उसका परिणाम और उससे बचने का प्रयास कैसे करें ?, इसकी जानकारी आज के लेख में दे रहे हैं ।

‘म्युकरमाइकोसिस’ अथवा ‘ब्लैक फंगस’ रोग के लक्षण और उस पर होमियोपैथिक औषधियों के उपचार !

‘ब्लैक फंगस’ एक प्रकार की फफूंद है तथा वह घासफूस तथा प्राणियों के गोबर के स्थान पर दिखाई देती है । इसका बीज हवा से वातावरण में फैलता है और श्‍वास द्वारा हमारी नाक में जाता है । हमारी प्रतिरोधक शक्ति अच्छी हो, तो हमारे शरीर पर उसका परिणाम नहीं होता ।

प्रारब्ध 

‘अध्यात्म विषयक बोधप्रद ज्ञानामृत’ लेखमाला से भक्त, संत तथा ईश्‍वर, अध्यात्म एवं अध्यात्मशास्त्र तथा चार पुरुषार्थ ऐसे विविध विषयों पर प्रश्‍नोत्तर के माध्यम से पू. अनंत आठवलेजी ने सरल भाषा में उजागर किया हुआ ज्ञान यहां दे रहे हैं । इस से पाठकों को अध्यात्म के तात्त्विक विषयों का ज्ञान होकर उनकी शंकाओं का निर्मूलन होगा तथा वे साधना करने के लिए प्रवृत्त होंगे ।

चिपळुण (जनपद-रत्नागिरी) में बाढ पीडितों के लिए सनातन संस्था, हिन्दू जनजागृति समिति एवं स्थानीय संस्था-संगठनों की ओर से ‘सहायता अभियान’ !

सनातन संस्था, हिन्दू जनजागृति समिति एवं स्थानीय संस्था-संगठनों की ओर से चिपळुण में बाढ पीडितों को खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है ।

भीषण रेल दुर्घटना में भी केवल गुरुकृपा से रक्षा होने के विषय में श्री श्याम राजंदेकर की अनुभूति

भीषण रेल दुर्घटना में भी केवल गुरुकृपा से तीव्र प्रारब्ध में कैसे रक्षा होती है यह श्री श्याम राजंदेकर की अनुभूति विस्तृत में जान लेंगे |

आपातकाल में आधार देनेवाली छतवाटिका (Terrace Gardening – टेरेस गार्डनिंग) भाग २

अपने घर में घर के लिए आवश्यक सब्जी, फल उगाना संभव हो, तो क्यों न उस हेतु प्रयास करें ? इससे घर की उत्कृष्ट सब्जी भी मिलेगी, साथ ही पैसे और श्रम की भी बचत होगी । वर्तमान में जैविक अथवा प्राकृतिक खेती के अंतर्गत छत पर खेती (टेरेस गार्डनिंग) की नई संकल्पना उदित हो रही है । इस विषय

स्मृतिकार एवं गोत्रप्रवर्तक पराशर ॠषि का तपोस्थल एवं ‘पराशर ताल’

हिमाचल प्रदेश को ‘देवभूमि हिमाचल’ कहा जाता है । युग-युग से हिमाचल प्रदेश देवताओं एवं ऋषि-मुनियों का निवासस्थान रहा है । यहां वसिष्ठ, पराशर, व्यास, जमदग्नि, भृगु, मनु, विश्वामित्र, अत्री आदि अनेक ऋषियों की तपोस्थली, साथ ही शिव-पार्वती से संबंधित अनेक दिव्य स्थान हैं ।

दिल्ली के स्कूल में सनातन संस्था द्वारा ऑनलाइन प्रवचन

 रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस के अवसर पर दिल्ली के साईदुला जेब, एमबी रोड स्थित लिटिल वन पब्लिक स्कूल में सनातन संस्था द्वारा ऑनलाइन प्रवचन का आयोजन किया गया ।