भीषण रेल दुर्घटना में भी केवल गुरुकृपा से रक्षा होने के विषय में श्री श्याम राजंदेकर की अनुभूति
भीषण रेल दुर्घटना में भी केवल गुरुकृपा से तीव्र प्रारब्ध में कैसे रक्षा होती है यह श्री श्याम राजंदेकर की अनुभूति विस्तृत में जान लेंगे |
भीषण रेल दुर्घटना में भी केवल गुरुकृपा से तीव्र प्रारब्ध में कैसे रक्षा होती है यह श्री श्याम राजंदेकर की अनुभूति विस्तृत में जान लेंगे |
अपने घर में घर के लिए आवश्यक सब्जी, फल उगाना संभव हो, तो क्यों न उस हेतु प्रयास करें ? इससे घर की उत्कृष्ट सब्जी भी मिलेगी, साथ ही पैसे और श्रम की भी बचत होगी । वर्तमान में जैविक अथवा प्राकृतिक खेती के अंतर्गत छत पर खेती (टेरेस गार्डनिंग) की नई संकल्पना उदित हो रही है । इस विषय
हिमाचल प्रदेश को ‘देवभूमि हिमाचल’ कहा जाता है । युग-युग से हिमाचल प्रदेश देवताओं एवं ऋषि-मुनियों का निवासस्थान रहा है । यहां वसिष्ठ, पराशर, व्यास, जमदग्नि, भृगु, मनु, विश्वामित्र, अत्री आदि अनेक ऋषियों की तपोस्थली, साथ ही शिव-पार्वती से संबंधित अनेक दिव्य स्थान हैं ।
रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस के अवसर पर दिल्ली के साईदुला जेब, एमबी रोड स्थित लिटिल वन पब्लिक स्कूल में सनातन संस्था द्वारा ऑनलाइन प्रवचन का आयोजन किया गया ।
जर्मनी में मूसलधार वर्षा के कारण ८१ लोगों की मृत्यु हो गई है एवं १०० से अधिक व्यक्ति लापता हो गए हैं ।
वर्तमान में जैविक अथवा प्राकृतिक खेती के अंतर्गत छत पर खेती (टेरेस गार्डनिंग) की नई संकल्पना उदित हो रही है । इस लेख से हम अपने घर शाक-तरकारी कैसे उगाएं ? इस विषय में जानकार लेंगे ।
संत तथा राष्ट्र व धर्म की रक्षा हेतु कार्य करनेवाली संस्था को दान करना, धर्मकार्य में अपना सहयोग देना है । ऐसा करने से ईश्वर की कृपा दृष्टि शीघ्र होने में सहायता मिलती है ।
वर्ष २०३० में जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र में जल का स्तर बढ़ेगा और चंद्रमा अपनी वर्तमान कक्षा से सरकेगा । अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के एक प्रतिवेदन के अनुसार इससे विनाशकारी बाढ़ आने की संभावना है।
‘धर्मशास्त्रानुसार व्यक्ति की मृत्यु होने पर श्मशान में शव पर मंत्रोच्चार सहित अग्निसंस्कार होना आवश्यक होता है । वर्तमान में ‘कोरोना’ महामारी के वैश्विक संकट के कारण भारी मात्रा में लोगों की मृत्यु हो रही है ।
‘१०.११.२०१९ को अधिक मात्रा में सेवा व शारीरिक परिश्रम होने के कारण मेरी कमर में पीडा होने लगी । मैंने इस संदर्भ में डॉक्टर से संपर्क किया; परंतु उनके ध्यान में कुछ नहीं आ रहा था अथवा वे मेरी इस बीमारी का अनुमान लगाने में रुचि नहीं ले रहे थे । वे प्रत्येक बार औषधियां दे रहे थे । अधिक मात्रा में पीडाहारी औषधियां लेने से मुझे पेट का भी बहुत कष्ट होने लगा ।