‘गुरु सर्व प्रकार से साधक का भार उठाते हैं’, इसकी साधक को हुई प्रतीति !

‘गुरुदेव किस प्रकार शिष्य की सभी बातों की ओर ध्यान देते हैं !’, इस विचार से मुझे गुरुदेव के प्रति पुनः-पुन: कृतज्ञता व्यक्त हो रही थी । वे अपने शिष्य का सर्व प्रकार से भार उठाते हैं…

कुटुंब के व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव’ होते हुए श्री. अतुल देव को नामजप एवं गुरुकृपा के संदर्भ में हुई अनुभूति

साधकों में साधना की गंभीरता टिकी रहे, इस हेतु संत निरंतर भान करवाते रहते हैं । ‘काल अपना मुंह खोले निगलने के लिए खडा है और प्रारब्ध का पहाड सिर पर है’, इस संतवचन की प्रचीति कोरोना महामारी के रूप में आए आपातकाल में मुझे कुछ मात्रा में अनुभव हुई । इस विषय में गत २ माह की अवधि में आए अनुभव यहां दिए हैं ।

पति को ’कोरोना विषाणु’का संसर्ग होने के उपरांत श्रीमती भक्ती भिसे को हुए अनुभव एवं अनुभूतियां !

पति श्री. नित्यानंद की ‘कोरोना विषाणु’ की जांच की गई । जांच की रिपोर्ट आने पर पता चला कि उन्हें कोरोना हुआ है । तब से मेरे नकारात्मक और डर के विचार बढ गए । जब उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भरती किया गया, तब मेरे मन में भय के विचार और अधिक बढ गए और मुझे असुरक्षित लगने लगा ।

भीषण रेल दुर्घटना में भी केवल गुरुकृपा से रक्षा होने के विषय में श्री श्याम राजंदेकर की अनुभूति

भीषण रेल दुर्घटना में भी केवल गुरुकृपा से तीव्र प्रारब्ध में कैसे रक्षा होती है यह श्री श्याम राजंदेकर की अनुभूति विस्तृत में जान लेंगे |

‘गुरु सर्व प्रकार से साधक का भार उठाते हैं’, इसकी साधक को हुई प्रतीति !

‘गुरुदेव किस प्रकार शिष्य की सभी बातों की ओर ध्यान रखते हैं !’, इस विचार से मुझे गुरुदेव के प्रति पुनः-पुन: कृतज्ञता व्यक्त हो रही थी । वे अपने शिष्य का सर्व प्रकार से भार उठाते हैं । आज भी मुझे इस प्रसंग का स्मरण होने पर मन कृतज्ञता से भर आता है ।

मदिरापान के अधीन एक व्यक्ति द्वारा नामजप एवं आध्यात्मिक उपायों का आरंभ किए जाने के पश्‍चात केवल १ ही मास में उसका व्यसन छूट जाना, यह सनातन संस्था द्वारा बताई गई साधना की श्रेष्ठता !

व्यसनमुक्त होने के लिए सहस्रोें रुपए का व्यय करनेपर भी व्यसन छुटेगा, ऐसा नहीं होता; क्योंकि व्यसन लगने के पीछे पूर्वजों का कष्ट अथवा अनिष्ट शक्तियों का कष्ट जैसे कष्ट हो सकते हैं ।

ब्रिटीश महिला को प्रतीत हुई महारुद्र अनुष्ठान की महीमा !

स्वतंत्रतापूर्वकाल में अफगानिस्तान और ब्रिटेन में युद्ध चल रहा था । इलाहाबाद के मार्टिन डेल नामक ब्रिटिश अधिकारी को भी युद्ध पर भेजा गया था । वह अपनी पत्नी को पत्र लिखता था ।

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