भीषण रेल दुर्घटना में भी केवल गुरुकृपा से रक्षा होने के विषय में श्री श्याम राजंदेकर की अनुभूति

भीषण रेल दुर्घटना में भी केवल गुरुकृपा से तीव्र प्रारब्ध में कैसे रक्षा होती है यह श्री श्याम राजंदेकर की अनुभूति विस्तृत में जान लेंगे |

‘गुरु सर्व प्रकार से साधक का भार उठाते हैं’, इसकी साधक को हुई प्रतीति !

‘गुरुदेव किस प्रकार शिष्य की सभी बातों की ओर ध्यान रखते हैं !’, इस विचार से मुझे गुरुदेव के प्रति पुनः-पुन: कृतज्ञता व्यक्त हो रही थी । वे अपने शिष्य का सर्व प्रकार से भार उठाते हैं । आज भी मुझे इस प्रसंग का स्मरण होने पर मन कृतज्ञता से भर आता है ।

मदिरापान के अधीन एक व्यक्ति द्वारा नामजप एवं आध्यात्मिक उपायों का आरंभ किए जाने के पश्‍चात केवल १ ही मास में उसका व्यसन छूट जाना, यह सनातन संस्था द्वारा बताई गई साधना की श्रेष्ठता !

व्यसनमुक्त होने के लिए सहस्रोें रुपए का व्यय करनेपर भी व्यसन छुटेगा, ऐसा नहीं होता; क्योंकि व्यसन लगने के पीछे पूर्वजों का कष्ट अथवा अनिष्ट शक्तियों का कष्ट जैसे कष्ट हो सकते हैं ।

ब्रिटीश महिला को प्रतीत हुई महारुद्र अनुष्ठान की महीमा !

स्वतंत्रतापूर्वकाल में अफगानिस्तान और ब्रिटेन में युद्ध चल रहा था । इलाहाबाद के मार्टिन डेल नामक ब्रिटिश अधिकारी को भी युद्ध पर भेजा गया था । वह अपनी पत्नी को पत्र लिखता था ।