प.पू. दादा महाराज झुरळे

१. वात्सल्यपूर्ण वाणी से अध्यात्म सिखानेवाले प.पू. दादा महाराज झुरळे ! वर्ष १९८३ में अध्यात्म में जिज्ञासा जागृत होने के पश्चात मैं अध्यात्म समझने के लिए अनेक सन्तों के पास जाता था । उनमें से एक थे प.पू. दादा महाराज झुरळे । उन्हें मैं दादा कहता था । मैं दादा के पास अध्यात्म सीखने के … Read more

सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के मार्गदर्शन में सनातन द्वारा विविध क्षेत्रों में किया आध्यात्मिक शोध

अनिष्ट शक्ति, घरों में हुए परिवर्तन और दैवीकणों से संबंधित सैकडों संदर्भ सनातन ने दृश्य-श्रव्य चक्रिकाओं में उपलब्ध करवा दिए हैं । इस शोधकार्य में महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय से भी सहायता मिल रही है । यह शोध अब महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के जालस्थल (वेबसाइट) पर प्रकाशित किए गए हैं ।

स्वसूचना

स्वभावदोष-निर्मूलन प्रक्रिया में स्वसूचना बनाना एवं स्वसूचना के अभ्याससत्र करना, ये दो महत्त्वपूर्ण चरण हैं । इनमें से यदि एक भी चरण पर चूक हो जाए, तो प्रक्रिया का अपेक्षित परिणाम नहीं दिखाई देता ।

स्वभावदोष के लिए स्वसूचना की उपचारपद्धति निश्चित करना और स्वसूचना बनाना

प्रक्रिया के अंंतर्गत प्रत्येक स्वभावदोष के लिए स्वसूचना की उपचारपद्धति निश्चित करना और स्वसूचना बनाना

दाभोलकर की अंनिस के घोटालों पर मुख्यमंत्री क्या कार्यवाही करेंगे ?

डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ट्रस्ट के घोटाले देख विशेष लेखा परीक्षण (स्पेशल ऑडिट) किया जाए, ट्रस्ट पर लगे गंभीर आरोपों की जांच की जाएं, ऐसी अनेक कठोर टिप्पणियां सातारा के सार्वजनिक न्यास पंजीकरण कार्यालय के अधीक्षक ने जांच प्रतिवेदन में की है ।

पत्रकारिता साधना के रूप में करें – श्री. चेतन राजहंस, प्रवक्ता, सनातन संस्था

प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस ने ऐसा प्रतिपादित किया कि, दैनिक सनातन प्रभात हिन्दुओं पर होनेवालेअन्याय को उजागर करनेवाला एकमात्र दैनिक है ! अतः वार्ताहर सेवा के माध्यम से हमें निश्चित रूप से धर्मकार्य करने का अवसर मिल रहा है।

स्वभावदोष-निर्मूलन सारणी का स्वरूप एवं लिखने की पद्धति

१. स्वभावदोषोंका चयन १ अ. ‘स्वभावदोष सारणी’से तीव्र स्वभावदोष पहचानें प्रत्येक में अनेक स्वभावदोष होते हैं। जो स्वभावदोष तीव्र हैं, उन्हें पहले दूर करना महत्त्वपूर्ण है। तीव्र स्वभावदोष ‘स्वभावदोष सारणी’से पहचानें। मान लो, किसीकी सारणी में ‘आलस्य’ इस दोषसे सम्बन्धित अनेक प्रसंग हों, तो समझ लो कि उसमें ‘आलस्य’ यह दोष तीव्र है । यदि … Read more

मन, संस्कार एवं स्वभाव

आधुनिक मानसशास्त्र के अनुसार मन के दो भाग होते हैं । पहला भाग, जिसे हम ‘मन’ कहते हैं, वह ‘बाह्यमन’ है । दूसरा अप्रकट भाग ‘चित्त (अंतर्मन)’ है । मन की रचना एवं कार्य में बाह्यमन का भाग केवल १० प्रतिशत जबकि अंतर्मन का ९० प्रतिशत है ।

पुणे में नवरात्रि उत्सव के समय में होनेवाले अनाचारों को रोकने के संदर्भ में पुलिस को ज्ञापन प्रस्तुत

हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से सिंहगढ मार्ग के पुलिस थाने के पुलिस निरीक्षक श्री. बबन खोडदे को नवरात्रि उत्सव की कालावधि में होनेवाले अनाचार रोकने तथा इस उत्सव को धार्मिक वातावरण में एवं धर्मशास्त्र के अनुसार मनाने के संदर्भ में ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

स्वभावदोष (षड्रिपू)-निर्मूलन प्रक्रिया प्रारंभ करने से पूर्व ध्यान देनेयोग्य सूचनाएं

हम इस लेख में स्वभावदोष (षड्रिपू)-निर्मूलन प्रक्रिया में आनेवाली प्रमुख बाधा, सफल प्रक्रिया के लिए आवश्यक गुण एवं स्वभावदोष निर्मूलन प्रक्रियांतर्गत कृति के चरण, यह जानेंगे ।