प.पू. दादा महाराज झुरळे

प.पू. दादा महाराज झुरळे, डोंबिवली, जनपद ठाणे.

१. वात्सल्यपूर्ण वाणी से अध्यात्म सिखानेवाले प.पू. दादा महाराज झुरळे !

वर्ष १९८३ में अध्यात्म में जिज्ञासा जागृत होने के पश्चात मैं अध्यात्म समझने के लिए अनेक सन्तों के पास जाता था । उनमें से एक थे प.पू. दादा महाराज झुरळे । उन्हें मैं दादा कहता था । मैं दादा के पास अध्यात्म सीखने के लिए लगभग एक वर्ष तक सप्ताह में एक बार जाता था । अध्यात्म सिखाने की दादा की कला अनोखी थी । दादा उदाहरण देकर सरल भाषा में जिस प्रकार विषय प्रस्तुत करते थे, उस प्रकार विषय प्रस्तुत करनेवाले दूसरे सन्त मैंने नहीं देखे । दादा की वाणी वात्सल्यपूर्ण थी । उनकी एक विशेषता यह थी कि वे कभी महाराज के समान व्यवहार नहीं करते थे । वे हमें घर के सदस्य जैसा ही समझते थे । हमारे घर के आस-पास के क्षेत्र में आने पर वे उस समय हमारे घर पर भी आते थे । – (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले (३.१.२०१०)

 

२. प.पू. झुरळे महाराज की प्रीति

१. वर्ष १९८६ में प.पू. दादा महाराज झुरळे ने एक छोटे बालक के समान मेरा चुंबन लिया तथा मेरी प्रशंसा की । इससे पहले उनके अन्य शिष्यों ने उनके द्वारा इस प्रकार किसी की प्रशंसा करते हुए नहीं देखा था; इसलिए उन्हें आश्‍चर्य हुआ । – (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले

२. प.पू. झुरळे महाराज ८७ वर्ष की आयु में स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण लगभग एक वर्ष तक बिस्तर पर पडे हुए थे । उस समय मैंने उनसे कहा, ‘‘आपसे मिलने हेतु आना चाहिए; परंतु अस्वस्थ होने के कारण मैं कहीं नहीं जा पाता । उस समय वे बोले, ‘‘आपको यहां आने की आवश्यकता नहीं है, आप तो मेरे हृदय में ही हैं । आपके स्वास्थ्य की मुझे जानकारी है । मुझे ही आपसे मिलने आना है । उसके लिए शक्ति प्रदान करने हेतु मैं (दत्त) महाराज से प्रार्थना कर रहा हूं ।’’

– (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले (२०.११.२००९)

 

३. परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के स्वास्थ्य के लिए प.पू. झुरळे महाराजजी द्वारा किए गए उपचार

प.पू. झुरळे महाराज (आयु ८७ वर्ष) ने दैनिक सनातन प्रभात में मेरे अस्वस्थ होने के सम्बन्ध में पढा । ९.६.२००९ को दूरभाष कर उन्होंने निम्नांकित सूत्र बताए ।

१. पंख होते, तो उडकर गोवा पहुंचता ।

२. स्वास्थ्य सुधरने हेतु निरन्तर प्रार्थना चल रही है । आपके स्वास्थ्य में सुधार हाे इसलिए अखंड प्रार्थना कर रहा हूं ।

३. १०.६.२००९ को नरसोबा की वाडी जाकर तीन दिन रहकर पांच याग करनेवाला हूं ।

– (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले (९.६.२००९)

(उसके अनुसार उन्होंने ११ से १३ जून २००९ की अवधि में श्रीक्षेत्र नरसोबा की वाडी में दत्तयाग किया तथा परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी को हो रही आध्यात्मिक पीडा के निवारण हेतु संकल्प किया । – संकलनकर्ता)

 
४. प.पू. झुरळे महाराज द्वारा देवद (पनवेल)
स्थित सनातन आश्रम के साधकों को कृपाप्रसाद मिलना

प.पू. झुरळे महाराज सनातन के देवद आश्रम में निवास करनेवाले साधकों के लिए गत तीन मास से (महीनों से) प्रत्येक रविवार को दोपहर का भोजन मिष्ठान्न सहित दे रहे थे । इस प्रकार उनका कृपाप्रसाद साधकों को मिला । इतना ही नहीं, आश्रम के साधकों के जन्मदिन पर भी भोजन में मिठाई भेजने की व्यवस्था उन्होंने की थी । इसलिए आश्रम के साधकों को उससे चैतन्य और साधना करने हेतु स्फूर्ति मिली । प.पू. महाराजजी ने डोंबिवली (जनपद ठाणे) में सम्पन्न हुई हिन्दू जनजागृति सभा के समय भी कार्यकर्ताआें के भोजन की व्यवस्था की थी ।

 

५. अन्तिम समय में अस्वस्थ होते हुए भी हर २ – ३ सप्ताह में
प.पू. झुरळे महाराजजी का दूरभाष करना, उनकी चैतन्यदायी वाणी से
सदैव उत्साह का अनुभव होना तथा उनका बोलना मार्गदर्शक होना

गत एक वर्ष से अस्वस्थ होने के कारण प.पू. दादा को बोलते समय कष्ट होता था । तब भी वे हर दो-तीन सप्ताह में दूरभाष करते थे । दूरभाष पर उनके पहले शब्द होते थे, डॉक्टर, समय है न ? इतना वे दूसरों का विचार करते थे । प्रत्यक्ष में प.पू. दादा से बोलते समय उनकी चैतन्यदायी वाणी के कारण मुझे उत्साह प्रतीत होता था तथा २०-२५ मिनट कैसे बीत गए, यह पता ही नहीं चलता था । प्रत्येक बार दूरभाष पर बोलते समय दो – चार सूत्र ऐसे होते थे, जो मैं लिख लेता था ।

 

६. देहत्याग से ५ – ६ दिन पूर्व स्वयं का स्वास्थ्य
ठीक न होते हुए भी प.पू. झुरळे महाराजजी का दूरभाष से
प्रथम परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के स्वास्थ्य की पूछताछ करना

देहत्याग से ५-६ दिन पूर्व उन्होंने दूरभाष किया । उस समय उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था, तब भी उन्होंने पहले मेरे स्वास्थ्य की पूछताछ की । तत्पश्चात खांसी के कारण वे बोल नहीं पाए; परंतु उनकी खांसी सुनकर भी मुझे चैतन्य की अनुभूति हुई ।

अपने भक्तों के समान ही सनातन के साधकों पर निरपेक्ष प्रेम करनेवाले प.पू. दादा ऐसे थे !

– (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले (३.१.२०१०) (प.पू. झुरळे महाराजजी के निर्वाणोपरांत उनके विषय में किया लेखन)

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