बाह्य आडंबर की अनदेखी कर साधकों के उद्धार हेतु प्रयासरत रहनेवाले परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी !

‘हर चमकती चीज सोना नहीं होती ।’ उज्जैन के सिंहस्थ पर्व में प्रसिद्ध साधु-संतों की ओर लोग आकर्षित हो रहे हैं ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के शरीर में विद्यमान निर्गुण तत्त्व के कारण उनके सिरहाने के आवरणपर ॐ अंकित होने का अर्थ ‘ॐ’ कार के माध्यम से सगुणरूप में साकार नादब्रह्म !

८.७.२०१९ को परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के नियमित उपयोगवाले सिरहाने के आवरण के २ स्थानोंपर ॐ अंकित हुआ दिखाई दिया ।

अध्यात्म के सर्वोच्चपदपर विराजमान होते हुए भी अखंडित शिष्यभाव में रहनेवाला महान व्यक्तित्व !

प.पू. डॉक्टजी सर्वोच्च परात्पर गुरुपदपर विराजमान हैं । इतनी उच्च स्थिति में होते हुए भी प.पू. डॉक्टरजी ने अपने शिष्यत्व को टिकाए रखा है । यह उनके अनेक कृत्यों से सिखने के लिए मिलता है ।

संतों के प्रति भाव रखनेवाले तथा जिन्होंने वास्तव में संतत्व का मोल जाना, वे परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी !

जो सच्चे संत हैं, उनके प्रति परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का भाव कैसा होता है, इसके कुछ प्रातिनिधिक उदाहरण हम इस लेख में देखेंगे । शब्दशः बताना हो, तो परात्पर गुरुदेवजी ने संतों का मोल जितना जाना है, उतना शायद ही अभीतक किसी ने जाना होगा ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के सिर के बालों के आकार में बदलाव आने का विश्‍लेषण !

संतों के चरणों से चैतन्य का सर्वाधिक प्रक्षेपण होता है । उसी प्रकार से अवतारी कार्य करनेवाले परात्पर गुरुदेवजी के सिर के बालों के मूल से समष्टि हेतु आवश्यक चैतन्य प्रक्षेपण होता है ।

हिन्दू धर्म के व्यापक अभ्यासी डॉ. शिबनारायण सेन संतपद पर विराजमान !

अष्टम अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन में १ जून को कोलकाता (बंगाल) की शास्त्र धर्म प्रचार सभा के ‘ट्रुथ’ पाक्षिक के संपादक तथा हिन्दू धर्म के व्यापक अभ्यासी डॉ. शिबनारायण सेन के संतपद पर विराजमान होने का, तो तेजपुर (असम) की श्रीमती राणू बोरा तथा हावडा (बंगाल) के श्री. अनिर्बान नियोगी द्वारा ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त किए जाने की घोषणा की गई ।

प्रभु श्रीराम के प्रति उत्कट भाव एवं राममंदिर निर्माण के लिए समर्पित अधिवक्ता हरि शंकर जैन संतपद पर विराजमान !

अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन में संतपद प्राप्त करनेवाले पू. (अधिवक्ता) हरि शंकर जैनजी प्रथम हिन्दुत्वनिष्ठ है ! साथ हि उनके सुपुत्र अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन (३३ वर्ष) एवं उनके पोते ‘दैवी बालक’ चि. वृषांक (१ वर्ष १० मास) का भी ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर घोषित किया गया ।

बेंगळूरु (कर्नाटक) के अधिवक्ता विजयशेखर ने प्राप्त किया ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर !

शांत एवं विनम्र स्वभाववाले, प्रामाणिक वृत्ति के और अन्याय के विरुद्ध लडने की लगन रखनेवाले बेंगळूरु (कर्नाटक) के अधिवक्ता विजयशेखर ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर, जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हुए ।नातन संस्था के कर्नाटक राज्य धर्मप्रसारक पू. रमानंद गौडा के शुभहस्तों श्रीकृष्ण की प्रतिमा भेंट देकर उनका सत्कार किया गया ।

केवल साधक ही नहीं, ,अपितु प्राणी, पशु और पक्षियोंपर भी प्रेमकी वर्षा कर उन्हें अपनानेवाले प.पू. गुरुदेवजी !

सनातन संस्थाके अनेक साधक, बालसाधक एवं युवासाधक पूर्णकालीन साधना हेतु आश्रममें रहने आते हैं, वह केवल परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा उनपर किए जानेवाले निरपेक्ष प्रेमभावके कारण ही !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के कृतज्ञताभाव को दर्शानेवाली अद्वितीय तथा आदर्शवत् कृतियां !

प.पू. बाबाजी द्वारा उपयोग की गई गाडी का आश्रम में आगमन होनेपर उनमें मानो प.पू. बाबाजी ही आश्रम में आए हैं, इस प्रकार का आनंद था ।