अपनी सहज बातचीत एवं सरल व्यवहार से भक्तों को सिखानेवाले प.पू. भक्तराज महाराजजी !

ऐसे अनेक प्रसंग हैं कि जब आरंभ में प.पू. भक्तऱाज महाराजजी की बातें तर्कहीन लगी थीं; परंतु गुरु की कोई भी बात तथा उनका व्यवहार वैसा नहीं होता । अर्थात वे जो बोलते हैं, वह हमें उस समय समझ में नहीं आता; परंतु कुछ समय उपरांत हमें उन बातों में छिपा अर्थ समझ में आता है ।

संत प.पू. भक्तराज महाराजजी के आश्रम एवं उनकी छायाचित्रात्मक स्मृतियां !

प.पू. भक्तराज महाराज सनातन के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के गुरु थे । उन्हीं के कृपाशीर्वाद से सनातन की स्थापना हुई । सनातन को प.पू. बाबा के उत्तराधिकारी प.पू. रामानंद महाराज का भी कृपाछत्र मिला । उनके आशीर्वाद से वर्ष १९९१ में स्थापित हुए सनातन के कार्य का विस्तार किसी ‍विशाल वटवृक्ष समान हो गया है । सनातन परिवार प.पू. बाबा के श्रीचरणों में कोटि-कोटि कृतज्ञ है !

भक्तोंपर अखंड कृपाछत्र रखनेवाले प.पू. भक्तराज महाराज !

  अनुक्रमणिका१. त्रैलोक्य के योगीराज अवतरित हुए धरतीपर ।२. संत भक्तराज महाराज द्वारा शिष्यावस्था में तडप के साथ की गई गुरुसेवा३. संत भक्तराज महाराज के जीवन की त्रिसूत्री : भजन, भ्रमण एवं भंडारा !३ अ. भजन३ आ. भ्रमण३ इ. भंडारा४. भक्तों से समरस संत भक्तराज महाराज !५. माया में होते हुए भी वैराग्‍यभाव में रहनेवाले … Read more

भजन, भंडारों और नामस्मरण के माध्यम से अध्यात्म सिखानेवाले संत भक्तराज महाराज !

७.७.२०१९ से संत भक्तराज महाराज ने १००वें वर्ष में पदार्पण किया है । (यह दिन संत भक्तराज महाराज का १००वां जन्मदिवस) उन्हींकी कृपा से प्रेरणा लेकर उनके सभी भक्तों ने सर्वसम्मति से इस वर्ष को उनके शताब्दी वर्ष में मनाने का सुनिश्‍चित किया है ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के गुरु एवं उनके कार्य के प्रेरणास्रोत परमपूज्य भक्तराज महाराज !

प.पू. भक्तराज महाराज ही परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के कार्य के प्रेरणास्रोत हैं । इस संदर्भ में शब्दों में कुछ व्यक्त करना अत्यंत कठिन है । प.पू. बाबा का परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के प्रति प्रेम तथा उनके कार्य को मिले प.पू. बाबा के आशीर्वाद सांसारिक अर्थों में समझ सकें, इसके लिए यहां दे रहे हैं ।