विठ्ठल का मूर्तिविज्ञान
मूर्ति की कमर का नीचला भाग ब्रह्मास्वरूप, कमर से लेकर गर्दनतक का भाग श्रीविष्णुस्वरूप, तो मस्तक का भाग शिवस्वरूप है ।
मूर्ति की कमर का नीचला भाग ब्रह्मास्वरूप, कमर से लेकर गर्दनतक का भाग श्रीविष्णुस्वरूप, तो मस्तक का भाग शिवस्वरूप है ।
यह स्तोत्र साक्षात् ब्रह्माजी ने ही कहा है । इसकी फलश्रुति का वर्णन गणेश भगवान ने इसप्रकार किया है – ‘इससे कारागृह के निरपराध कैदी ७ दिनों में मुक्त हो जाते हैं । स्तोत्र भावपूर्ण कहने से फलनिष्पति मिलती है ।
‘गणपति अथर्वशीर्ष’ यह श्री गणेश का दूसरा सर्वपरिचित स्तोत्र है । ‘अथर्वशीर्ष’ का ‘थर्व’ अर्थात ‘उष्ण.’ अथर्व अर्थात शांति’ एवं ‘शीर्ष’ अर्थात ‘मस्तक’ । जिसके पुरश्चरण से शांति मिलती है, वह है ‘अथर्वशीर्ष’ ।
नियंत्रक और महालेखापरीक्षक का आर्थिक वर्ष २०१०-११ (३१ मार्च २०११ को समाप्त हुआ आर्थिक वर्ष) के ब्यौरे में जलप्रदूषण के स्रोत के विषय में बताते हुए उन्होंने पशुवधगृहों का उल्लेख किया था । उसमें आगे दिए अनुसार कहा है ।
श्री गणेश ब्रह्मांड की दूूषित शक्ति को आकर्षित करनेवाले हैं, इसके साथ ही मनुष्य की बुद्धि में विवेक निर्माण करनेवाले हैं । श्री गणेश की उपासना से विकल्पशक्ति प्रभाव नहीं डालती ।
महाराष्ट्र की नगरपालिका और नगरपरिषद के क्षेत्रों में प्रतिदिन निर्माण होनेवाले अपशिष्ट जल, उस पर की जानेवाली प्रक्रिया और उसका निस्तारण, इस विषय की एक सारणी शासन ने ही प्रकाशित की है । यह सारणी फरवरी २०१४ की है । इससे आपके ध्यान में आएगा कि जलप्रदूषण गणेश मूर्ति के कारण होता है कि शासकीय अधिकारियों की कामचोरी के कारण ?
प.पू. रामभाऊस्वामीजी यज्ञकुंडपर अग्नि के प्रज्वलित होने के समय उसमें स्वयं को समर्पित करते हैं । इस संदर्भ में वैज्ञानिक दृष्टि से शोध करनेवाले यदि हमारी सहायता करते हैं, तो हम उनके प्रति कृतज्ञ रहेंगे ।
यज्ञसंस्कृति की रक्षा हेतु प्रयासशील तंजावूर, तमिलनाडू के महान योगी प.पू. रामभाऊस्वामीजी अपने विशेषतापूर्ण यज्ञों द्वारा समाज को भौतिक तथा आध्यात्मिक स्तर का लाभ पहुंचाने का दैवीय कार्य कर रहे हैं । उन्होंने १५.१.२०१६ को गोवा के सनातन आश्रम में उच्छिष्ट गणपति यज्ञ का आरंभ किया । इस यज्ञ का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन ।
केवल पुण्यसंचय हो, इस सद्हेतु से एकादशी की ओर देखना अयोग्य है । एकादशी व्रत करने के सर्वंकश लाभ समाज, राष्ट्र और व्यक्ति को हुए हैं और होनेवाले हैं । हिन्दू धर्म के प्रत्येक माह में दो एकादशी आती हैं ।
धर्म होगा, तो ही राष्ट्र्र में सुख, शांति होती है । धर्म यह आचरण का विषय है । स्वास्थ्य के नियम न मानने पर शरीर में रोग निर्माण होते है । धर्म न मानने पर समाज में भ्रष्टाचार, अनैतिकता, अपराध इत्यादि रोग निर्माण होते है ।