प्रेस की स्वतंत्रता का डंका पीटनेवाले सनातन विरोधी पत्रकारों का वास्तविक रूप !
पांच वर्ष पहले सनातन प्रभात में प्रकाशित लेख के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा संकट में पड गई थी, तो उसी समय शिकायत क्यों नहीं की ?
पांच वर्ष पहले सनातन प्रभात में प्रकाशित लेख के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा संकट में पड गई थी, तो उसी समय शिकायत क्यों नहीं की ?
कर्नाटक राज्य के वर्तमान कांग्रेस-जनता दल (धर्मनिरपेक्ष) सरकार पुलिस और सरकार ने संविधान की धाराआें का दुरुपयोग कर, विरोधी विचारधारा के हिन्दुत्वनिष्ठों को समाप्त करने का षड्यंत्र ही चला रही है ।
गोरक्षक श्री. वैभव राऊत को विस्फोटक रखने के कथित अपराध के प्रकरण में आतंकवाद विरोधी दल ने बंदी बनाया । उन्हें सनातन
का साधक कहकर सनातन संस्था पर प्रतिबंध की मांग की जा रही है ।
चारों ओर विषम स्थिति होते हुए भी सनातन के अधिकांश साधक आनंदित हैं । उनके चेहरे पर किसी भी प्रकार का तनाव अथवा भय प्रतीत नहीं होता । ऐसा होना अर्थात उनकी साधना अच्छी चलने का लक्षण है ।
पिछले अनेक वर्षों से भारत में वामपंथी आंदोलन के नेताआें ने आधुनिकतावादी, समाजवादी कार्यकर्ताआें का बुरखा ओढकर समाज में साम्यवादी विचार फैलाने का कार्य किया है ।
सनातन संस्था पर कोर्इ भी प्रतिबंध नहीं लगा सकता । सनातन पर प्रतिबंध के विरोध में मैं आवाज उठाऊंगा ।’
हिन्दू जनजागृति समिति की आेर से ८ सितंबर को यहां राष्ट्रीय हि्न्दू आंदोलन संपन्न हुआ । इस आंदोलन में सनातन संस्था पर प्रतिबंध की मांग तथा हिन्दुत्वनिष्ठों पर हो रही अन्यायपूर्ण कार्यवाही एवं नक्सललवादियों के समर्थक, विचारक, सामाजिक कार्यकर्ता आदि कहलानेवालों का निषेध किया गया ।
सनातन संस्था का कार्य अच्छा है । सनातन के विरुद्ध बिना किसी कारण आरोप लगाकर धर्मकार्य में बाधाएं उत्पन्न करना, तो अधर्म है ।
सनातन संस्था की श्रीमती छाया टवलारे ने ‘आनंदमय जीवन के लिए अध्यात्म’ विषयपर प्रवचन किया ।
नालासोपारा विस्फोटक प्रकरण आैर दाभोलकर हत्या प्रकरण के अनुषंग से गत एक महीने में ९ हिन्दुत्वनिष्ठों को बंदी बनाया गया है । इनमें से कोर्इ भी सनातन संस्था का साधक नहीं है, तब भी सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने की मांग कुछ राजनीतिक दल, संगठन, तथाकथित आधुनिकतावादी, मुसलमान नेता आदि कर रहे हैं ।