आतंकवादियों को ‘अजहरजी’ और ‘ओसामाजी’ कहनेवाली कांग्रेस का संबंध सनातन संस्था से जोडना, राजनीतिक दुष्प्रचार !

राजनीतिक स्पर्द्धा में सनातन संस्था का उपयोग किया गया है । इस दुष्प्रचार पर हिन्दू समाज विश्‍वास न करे, यह आवाहन सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस ने आज किया है ।

पुण्य का परिणाम 

मनुष्यको पुण्य की मात्रा अनुसार इहलोक में सुखप्राप्ति होती है और अंत में उसी पुण्य के बलपर स्वर्गसुख भी मिलता है । समष्टि पुण्य बढनेपर राष्ट्र आचारविचार संपन्न एवं समृद्ध होता है ।

पुण्य के प्रकार 

जीवन कर्ममय है । कर्मफल अटल है । अच्छे कर्म का फल पुण्य है तथा उससे सुख प्राप्त होता है, जबकि बुरे कर्म का फल पाप है और उससे दुःख प्राप्त होता है । पुण्य के निम्न प्रकार हैं …

सोलह संस्कार

धर्म सिखाता है कि मनुष्य-जन्म ईश्‍वरप्राप्ति के लिए है; इसलिए जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रत्येक प्रसंग में ईश्‍वर के निकट पहुंचने के लिए आवश्यक उपासना कैसे की जाए, इसका मार्गदर्शन धर्मशास्त्र में किया गया है ।

पुण्य की व्याख्या एवं मिलने के कारण

जीवन कर्ममय है । कर्मफल अटल है । अच्छे कर्म का फल पुण्य है तथा उससे सुख प्राप्त होता है, जबकि बुरे कर्म का फल पाप है और उससे दुःख प्राप्त होता है ।

सोते समय शरीर की स्थिति कैसी होनी चाहिए ?

नींद का उद्देश्य शरीर को विश्राम मिले, यह होता है । इस दृष्टि से जिस स्थिति में शरीर को सर्वाधिक विश्राम मिलेगा, वह नींद की स्थिति अच्छी होती है, यह सामान्य नियम है ।

परात्पर गुरु पांडे महाराज का छायाचित्रमय जीवनदर्शन

ईश्वर की कृपा से ही प.पू. बाबाजी के छायाचित्रों द्वारा दर्शाया गया यह अल्प परिचय उनके चरणों में सविनय अर्पण करते हैं !

सात्त्विक शक्ति के बलपर धर्मबोध एवं शौर्यबोध को जागृत करने का सनातन संस्था द्वारा हाथ में लिया गया कार्य प्रशंसनीय है ! – के.एन्. गोविंदाचार्य, इटर्नल हिन्दू फाऊंडेशन

भारत ही सात्त्विक शक्ति का केंद्रीय भूतपूर्व स्थान है । इस सत्य को जानकर सात्त्विक शक्ति का जागरण एवं शौर्यबोध इन दोनों का जागृत करने का सनातन संस्था द्वारा हाथ में लिया गया कार्य बहुत ही प्रशंसनीय है ।

यज्ञ का प्रथमावतार ‘अग्निहोत्र’के विषय में वैज्ञानिक शोध !

विज्ञान के माध्यम से अग्निहोत्र का वातावरणपर क्या परिणाम होता है ?, इसके अध्ययन हेतु महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय की ओर से एक परीक्षण किया गया । इस परीक्षण हेतु यू.टी.एस्. (युनिवर्सल थर्मो स्कैन) उपकरण का उपयोग किया गया ।

एक दिन यज्ञ करने से १०० यार्ड क्षेत्र में १ मासतक प्रदूषण नहीं हो सकता ! – अवकाश वैज्ञानिक डॉ. ओमप्रकाश पांडेय

बेंगलुरु की प्रयोगशाला में किए गए परीक्षण से यह प्रमाणित हुआ है कि हम हवन और यज्ञ कर स्वयं को रोगों से दूर रख सकते हैं । एक दिन यज्ञ करने से १०० यार्ड क्षेत्र में १ मासतक प्रदूषण नहीं हो सकता ।