किन्नीगोळी, कर्नाटक के प.पू. देवबाबा का सनातन के रामनाथी आश्रम में शुभागमन !
किन्नीगोळी, कर्नाटक के प.पू. देवबाबा तथा उनकी पत्नी श्रीमती ज्योति राव का ३० मार्च को रामनाथी (गोवा) के सनातन के आश्रम में शुभागमन हुआ ।
किन्नीगोळी, कर्नाटक के प.पू. देवबाबा तथा उनकी पत्नी श्रीमती ज्योति राव का ३० मार्च को रामनाथी (गोवा) के सनातन के आश्रम में शुभागमन हुआ ।
२६ मार्च को डॉ. मधुसूदन घाणेकर तथा उनकी पत्नी श्रीमती मेघना घाणेकर ने यहां के सनातन आश्रम का अवलोकन किया ।
गर्मी के विकारोंपर घरेलु औषधियां। गला, छाती अथवा पेट में जलन होना; मूत्रविसर्जन के समय जलन होना; शरीरपर फोडे आना; आंखें, हाथ अथवा पैरों का गर्म हो जाना; मासिक धर्म के समय अधिक रक्तस्राव होना तथा शौच में रक्त जाना।
व्यक्तिने अपने पूर्वजन्मों में जो कुछ अच्छे कर्म, परोपकार एवं दानधर्म किए होंगे, उसका फल पुण्य के रूप में एकत्र होता है और वह आपको अगले जन्म में सुख के रूप में मिलता है ।
जिन पातकों के लिए स्मार्त धर्मशास्त्र में प्रायश्चित बताए गए हैं, वे निम्नानुसार हैं ।
चाकरी में (नौकरी में) घूस लेना पडता है । न लेने पर ऊपर के एवं नीचे के लोग (वरिष्ठ एवं कनिष्ठ श्रेणी के लोग) बहुत कष्ट देते हैं । ऐसे में मन को बहुत कष्ट होता है । इसके लिए क्या करें ?
धर्मशास्त्र द्वारा निषिद्ध बताए गए कर्म करने से अथवा किसी व्यक्ति द्वारा अपने कर्तव्य न निभाए जाने से जो निर्मित होता है, वह ‘पाप’ है । उदा. चोरी करना, .
मनुष्यजन्म में अधर्माचरण एवं पापाचार कर मनुष्यजन्म का अनुचित उपयोग करने का अर्थ है, ईश्वरीय नियमों के विपरीत व्यवहार करना । जिसका जैसा कर्म होगा, उसके अनुसार ईश्वर उसे न्याय देते हैं; अतः मानव द्वारा होनेवाले अपराध के अनुसार उसे दंड मिलता ही है एवं उसे वह भोगकर ही समाप्त करना पडता है ।
धूलिवंदन एवं रंगपंचमी के दिन रंगों में रंगे हुए युवक-युवतियों द्वारा पानी में उतर जाने से जलाशय के होनेवाले प्रदूषण को रोकने हेतु हिन्दू जनजागृति समिति एवं अन्य समविचारी संगठनों की ओर से २१ मार्च को खडकवाला जलाशय रक्षा अभियान चलाया गया ।
कहीं-कहीं पुजारी उपर्युक्त प्रकार के अनुचित कृत्य करते हैं । इसलिए कुछ लोग पुजारीको पूजा का ‘अरि’, अर्थात शत्रु’ कहते हैं । ऐसे पुजारी अगले जन्म में देवालय के द्वारपर कुत्ता अथवा भिखारी बनकर रहते हैं ।