पाप की व्याख्या एवं प्रकार

धर्मशास्त्र द्वारा निषिद्ध बताए गए कर्म करने से अथवा किसी व्यक्ति द्वारा अपने कर्तव्य न निभाए जाने से जो निर्मित होता है, वह ‘पाप’ है । उदा. चोरी करना, .

पाप का फल (कर्मविपाक)

मनुष्यजन्म में अधर्माचरण एवं पापाचार कर मनुष्यजन्म का अनुचित उपयोग करने का अर्थ है, ईश्वरीय नियमों के विपरीत व्यवहार करना । जिसका जैसा कर्म होगा, उसके अनुसार ईश्वर उसे न्याय देते हैं; अतः मानव द्वारा होनेवाले अपराध के अनुसार उसे दंड मिलता ही है एवं उसे वह भोगकर ही समाप्त करना पडता है ।

पुणे के खडकवासला बांध का प्रदूषण रोकने के लिए आयोजित मानवीय शृंखला में सनातन संस्था का सहभाग !

धूलिवंदन एवं रंगपंचमी के दिन रंगों में रंगे हुए युवक-युवतियों द्वारा पानी में उतर जाने से जलाशय के होनेवाले प्रदूषण को रोकने हेतु हिन्दू जनजागृति समिति एवं अन्य समविचारी संगठनों की ओर से २१ मार्च को खडकवाला जलाशय रक्षा अभियान चलाया गया ।

देवालय के पुजारियों के अनुचित कृत्यों से लगनेवाले पाप

कहीं-कहीं पुजारी उपर्युक्त प्रकार के अनुचित कृत्य करते हैं । इसलिए कुछ लोग पुजारीको पूजा का ‘अरि’, अर्थात शत्रु’ कहते हैं । ऐसे पुजारी अगले जन्म में देवालय के द्वारपर कुत्ता अथवा भिखारी बनकर रहते हैं । 

आतंकवादियों को ‘अजहरजी’ और ‘ओसामाजी’ कहनेवाली कांग्रेस का संबंध सनातन संस्था से जोडना, राजनीतिक दुष्प्रचार !

राजनीतिक स्पर्द्धा में सनातन संस्था का उपयोग किया गया है । इस दुष्प्रचार पर हिन्दू समाज विश्‍वास न करे, यह आवाहन सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस ने आज किया है ।

पुण्य का परिणाम 

मनुष्यको पुण्य की मात्रा अनुसार इहलोक में सुखप्राप्ति होती है और अंत में उसी पुण्य के बलपर स्वर्गसुख भी मिलता है । समष्टि पुण्य बढनेपर राष्ट्र आचारविचार संपन्न एवं समृद्ध होता है ।

पुण्य के प्रकार 

जीवन कर्ममय है । कर्मफल अटल है । अच्छे कर्म का फल पुण्य है तथा उससे सुख प्राप्त होता है, जबकि बुरे कर्म का फल पाप है और उससे दुःख प्राप्त होता है । पुण्य के निम्न प्रकार हैं …

सोलह संस्कार

धर्म सिखाता है कि मनुष्य-जन्म ईश्‍वरप्राप्ति के लिए है; इसलिए जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रत्येक प्रसंग में ईश्‍वर के निकट पहुंचने के लिए आवश्यक उपासना कैसे की जाए, इसका मार्गदर्शन धर्मशास्त्र में किया गया है ।

पुण्य की व्याख्या एवं मिलने के कारण

जीवन कर्ममय है । कर्मफल अटल है । अच्छे कर्म का फल पुण्य है तथा उससे सुख प्राप्त होता है, जबकि बुरे कर्म का फल पाप है और उससे दुःख प्राप्त होता है ।

सोते समय शरीर की स्थिति कैसी होनी चाहिए ?

नींद का उद्देश्य शरीर को विश्राम मिले, यह होता है । इस दृष्टि से जिस स्थिति में शरीर को सर्वाधिक विश्राम मिलेगा, वह नींद की स्थिति अच्छी होती है, यह सामान्य नियम है ।