राम रक्षा स्तोत्र

जिस स्तोत्रका पाठ करनेवालोंका श्रीरामद्वारा रक्षण होता है, वह स्तोत्र है श्रीरामरक्षास्तोत्र । जो इस स्तोत्रका पाठ करेगा वह दीर्घायु, सुखी, संततिवान, विजयी तथा विनयसंपन्न होगा’, ऐसी फलश्रुति इस स्तोत्रमें बताई गई है ।

नववर्ष के शुभमहुर्तपर सनातन के प्रेरणास्रोत संत भक्तराज महाराज द्वारा उपयोग की गई चरणपादुकाओं का सनातन के आश्रम में आगमन

पणजी (गोवा) की संत भक्तराज महाराजजी ने उनकी गोवा की भक्त श्रीमती स्मिता राव को स्वयं उपयोग की गई चरणपादुकाएं (चप्पल) प्रसाद के रूप में प्रदान की थीं । दोपहर ४.३० बजे इन चरणपादुकाओं का रामनाथी आश्रम में शुभागमन हुआ ।

रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में ५५ वें हनुमत्कवच यज्ञ का भावपूर्ण वातावरण में समापन !

हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हो, परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का महामृत्युयोग टले तथा उन्हें स्वास्थ्यपूर्ण दीर्घायु प्राप्त हो, साथ ही साधकों की साधना में उत्पन्न सभी बाधाएं दूर हों; इस संकल्प से आरंभित ५५ यज्ञों का समापन हुआ ।

भारतीय संस्कृति के संवर्धन हेतु संग्रहालयों का विकास आवश्यक ! – श्री. चेतन राजहंस, प्रवक्ता, सनातन संस्था

‘प्रकृति में विद्यमान मूलस्थान के दोषों को दूर करना संस्कृति को विकसित करना है । भारतीय संस्कृति मनुष्य जीवन एवं प्रकृति के दोषों को दूर कर विकसित हुई है ।

किन्नीगोळी, कर्नाटक के प.पू. देवबाबा का सनातन के रामनाथी आश्रम में शुभागमन !

किन्नीगोळी, कर्नाटक के प.पू. देवबाबा तथा उनकी पत्नी श्रीमती ज्योति राव का ३० मार्च को रामनाथी (गोवा) के सनातन के आश्रम में शुभागमन हुआ ।

अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ज्योतिर्विद डॉ. मधुसूदन घाणेकर द्वारा रामनाथी के सनातन आश्रम का अवलोकन !

२६ मार्च को डॉ. मधुसूदन घाणेकर तथा उनकी पत्नी श्रीमती मेघना घाणेकर ने यहां के सनातन आश्रम का अवलोकन किया ।

गर्मी के विकारोंपर घरेलु औषधियां।

गर्मी के विकारोंपर घरेलु औषधियां। गला, छाती अथवा पेट में जलन होना; मूत्रविसर्जन के समय जलन होना; शरीरपर फोडे आना; आंखें, हाथ अथवा पैरों का गर्म हो जाना; मासिक धर्म के समय अधिक रक्तस्राव होना तथा शौच में रक्त जाना।

साधना कर पुण्य बढाने का महत्त्व

व्यक्तिने अपने पूर्वजन्मों में जो कुछ अच्छे कर्म, परोपकार एवं दानधर्म किए होंगे, उसका फल पुण्य के रूप में एकत्र होता है और वह आपको अगले जन्म में सुख के रूप में मिलता है ।

कर्मयोग के संदर्भ में शंकानिरसन

चाकरी में (नौकरी में) घूस लेना पडता है । न लेने पर ऊपर के एवं नीचे के लोग (वरिष्ठ एवं कनिष्ठ श्रेणी के लोग) बहुत कष्ट देते हैं । ऐसे में मन को बहुत कष्ट होता है । इसके लिए क्या करें ?