हृदय एवं श्वसनसंस्था को बल देनेवाली आयुर्वेद की कुछ प्रसिद्ध औषधियां

श्वसनसंस्था और हृदय को बल देने के लिए इस औषधि का अच्छा उपयोग होता है । दम घुटने समान होना, बारंबार घबराहट होना, छाती तेजी से धडकना जैसे हृदय से संबंधित विशिष्ट लक्षणों में इस औषधि का उपयोग होता है ।

अधिक वर्षावाले प्रदेशों में निरोगी रहने के लिए दिनभर में केवल २ बार आहार लें !

वर्षा ऋतु में दिन में केवल २ बार आहार लेने की आदत डालने से एक बार लिया हुआ अन्न पूर्णरूप से पचने के पश्चात ही दूसरा अन्न जठर में आता है । इससे अन्नपचन ठीक होता है । शरीर को अतिरिक्त २ बार अन्न पचाने का श्रम नहीं होते । इसलिए बची हुई शक्ति अब बदले हुए वातावरण के अनुकूल बनने के लिए उपयोग में आती है ।

गुजरात के ‘कर्णावती समन्वय परिवार गुजरात’ संस्था द्वारा उत्कृष्ट धर्मप्रचार कार्य के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री द्वारा सनातन संस्था का सम्मान !

उत्कृष्ट धर्मप्रचार कार्य के लिए सनातन संस्था का सम्मान भाजपा शासित गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री श्री. भूपेंद्रभाई पटेल के द्वारा किया गया । मुख्यमंत्री ने सनातन संस्था के गुजरात के साधक श्री. चंद्रशेखर कद्रेकर का शॉल और प्रमाणपत्र देकर सम्मान किया ।

नोएडा और फरीदाबाद में श्राद्ध के विषय में प्रवचन

श्राद्ध विषय के प्रवचन ग्रेटर नोएडा के अजनारा होम्स सोसाइटी, पंचशील ग्रिंस 1 तथा सूरजपुर में तथा फरीदाबाद के सेक्टर 22 के मंदिर में सनातन संस्था द्वारा आयोजित किए गए थे । कई लोगों ने इन प्रवचनों का लाभ लिया । सभी जिज्ञासूओं का बहुत ही अच्छा एवं सकारात्मक प्रतिसाद रहा ।

फरीदाबाद में सनातन संस्था द्वारा गणेश जी के विषय में शास्त्रीय जानकारी दी गई !

स्कूल में ऐसी जानकारी देना अनिवार्य होना चाहिए जिससे अपने देवी देवताओं का महत्व सभी की ध्यान में आकर हिंदू धर्म पर श्रद्धा बढ़ेगी !

गुरुग्राम में गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में सनातन संस्था की ग्रन्थ प्रदर्शनी !

श्री गणेश की उपासना सहित विभिन्न आध्यात्मिक विषयों पर श्रद्धालुओं को शास्त्रीय जानकारी मिलने की दृष्टि से श्री गणेश उत्सव पर गुरुग्राम स्थित में सनातन संस्था के साधकोंद्वारा दो दिनों का 7 सितंबर को शाम 5 से 9 बजे तक व 8 सितंबर को दोपहर 11.30 से 9 बजे रात्रि तक ग्रंथ प्रदर्शनी लगाई गई ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा स्नान के लिए उपयोग में लाए ‘मग’में काफी मात्रा में चैतन्य निर्माण होना

उच्च कोटि के संतों द्वारा दैनंदिन उपयोग में लाई निर्जीव वस्तुएं भी उन संतों में विद्यमान सत्त्वगुण से प्रभारित होकर पावन हो जाती हैं । संतों द्वारा उपयोग में लाई वस्तुओं का अध्ययन करने पर अध्यात्म की अनेक नई बातें सामने आईं हैं और प्राप्त हुए इस ज्ञान का, मानव के कल्याण के लिए उपयोग होगा ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की देह, उनके द्वारा उपयुक्त वस्तु एवं साधक के पूजाघर में रखे उनके छायाचित्र पर गुलाबी छटा आना

प.पू. डॉक्टरजी की आंखों के अंदर का भाग, त्वचा, नख, केश, जैसे पीले -सुनहरे हो रहे हैं, उसीप्रकार उनकी हथेलियां और पैरों के तलवे का भाग, जीभ एवं होंठ भी गुलाबी हो रहे हैं । यह प.पू. डॉक्टरजी में विद्यमान ईश्वर के सर्वव्यापी प्रीति के रंग का परिणाम है ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का विविध क्षेत्रों में शोधकार्य

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के मार्गदर्शन में हिन्दू आचार, आहार, वेशभूषा, केशभूषा, धार्मिक विधियां, यज्ञ, नामजप, मुद्रा, न्यास, श्रीयंत्र आदि का व्यक्ति, वस्तु एवं वातावरण पर होनेवाले परिणामों के विषय में विविध वैज्ञानिक उपकरणों द्वारा शोधकार्य शुरू है ।

सनातन संस्था द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम: ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन या छुपा अर्बन नक्सलवाद!’

सनातन धर्म को नष्ट करने के लिए शहरी नक्सलवादियों द्वारा लगातार साजिशें रची जा रही हैं । डॉ. नरेंद्र दाभोलकर और कॉ. गोविंद पानसरे जैसे आधुनिकतावादी की हत्याओं में सनातन संस्था को दोषी ठहराने के लिए अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति और शहरी नक्सलवादियों की साजिश थी, ऐसा सनातन संस्था के श्री. चेतन राजहंस ने कहा ।…