अनुक्रमणिका
- १. प.पू. डॉक्टरजी के हाथ- पैरों के तलवे, जीभ एवं होंठ भी गुलाबी होना, अर्थात उनमें विद्यमान ईश्वर के सर्वव्यापी प्रीति के रंग का चमत्कार !
- २. उंगलियों के पेरों का अग्रभाग अधिक गुलाबी होना
- ३. प.पू. डॉक्टर के बोलते समय होंठों का, इसके साथ ही जीभ का रंग अधिक गुलाबी होना ध्यान में आना
- परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की प्रीति का दृश्य परिणाम !

१. प.पू. डॉक्टरजी के हाथ- पैरों के तलवे, जीभ एवं होंठ भी गुलाबी होना, अर्थात उनमें विद्यमान ईश्वर के सर्वव्यापी प्रीति के रंग का चमत्कार !
‘प.पू. डॉक्टरजी की आंखों के अंदर का भाग, त्वचा, नख, केश, जैसे पीले -सुनहरे हो रहे हैं, उसीप्रकार उनकी हथेलियां और पैरों के तलवे का भाग, जीभ एवं होंठ भी गुलाबी हो रहे हैं । यह प.पू. डॉक्टरजी में विद्यमान ईश्वर के सर्वव्यापी प्रीति के रंग का परिणाम है ।
२. उंगलियों के पेरों का अग्रभाग अधिक गुलाबी होना
प.पू. डॉक्टरजी की हथेली की उंगलियों के पेरों का अग्रभाग अधिक गुलाबी दिखाई देता है; कारण उंगलियों का अग्रभाग कार्य में अधिक संवेदनशील होने से प्रीतिदर्शक गुलाबी रंग, इस भाग से अधिक बाहर निकलता दिखाई देता है ।
३. प.पू. डॉक्टर के बोलते समय होंठों का, इसके साथ ही जीभ का रंग अधिक गुलाबी होना ध्यान में आना
प.पू. डॉक्टरजी जब बोलते हैं, तब उनके होंठों का, उनके मुंह के अंदर की रिक्ती का और इसके साथ ही जीभ का रंग अधिक गुलाबी होता हु्आ दिखाई देता है । उनकी वाणी से समष्टि के कल्याण के लिए बाहर निकलनेवाली प्रीतिदर्शक तरंगों के स्पर्श से उनके मुंह की रिक्ती में प्रीतिदर्शक गुलाबी रंग की जागृति होने का यह लक्षण है ।’
– (सद्गुरु) श्रीमती अंजली गाडगीळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (१०.६.२०११)
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की प्रीति का दृश्य परिणाम !



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