अनुक्रमणिका

१. लक्ष्मीविलास रस
यह हृदय को उत्तेजना देनेवाली औषधि है । नाडी ठीक से न लगने पर इस औषधि के सेवन से उसके पूर्ववत् होने में सहायता होती है । इसके सेवन से रक्तवाहिनियां विस्फारित होती हैं और हृदय के आकुंचन और प्रसरण भी ठीक से होने में सहायता होती है । यह औेषधि वैद्य के परामर्श से ही लें । तात्कालिक (उस समय तक के लिए) औषधि लेनी हो तो एक गोली का चूर्ण थोडे शहद में मिलाकर खाएं । अन्य समय १५ दिवस से १ माह तक सवेरे – सायं एक-एक गोली का चूर्ण थोडे-थोडे शहद में मिलाकर, फिर चुभलाकर खाएं ।
१ अ. श्वसनसंस्था एवं रक्ताभिसरण संस्था के विकार
श्वसनसंस्था और हृदय को बल देने के लिए इस औषधि का अच्छा उपयोग होता है । दम घुटने समान होना, बारंबार घबराहट होना, छाती तेजी से धडकना जैसे हृदय से संबंधित विशिष्ट लक्षणों में इस औषधि का उपयोग होता है ।
१ आ. उलटियां और दस्त (जुलाब)
इसमें नाडी बल घटने पर इसका उपयोग करें ।
१ इ. आंतों का ज्वर (टायफॉईड)
आंतों में (अंतडियों का) विषैलापन नष्ट होने के लिए इस औषधि का उपयोग होता है । ज्वर (बुखार) के कारण आई कमजाेरी इस औषधि के सेवन से दूर होने में सहायता होती है ।
१ ई. सिरदर्द
एक समान वेदना होते रहना; माथा, भौहें, गर्दन और पीठ से एकाएक ही वेदना की तरंग उठाना; गरम सिकाई से अच्छा लगना और ठंडी हवा से वेदना बढना, ऐसे विशिष्ट लक्षणों वाले सिरदर्द में इस औषधि का उपयोग होता है ।
२. प्रभाकर वटी
यह औषधि हृदय को बल देनेवाली है । यह ‘छाती जोरों से धडकना’, इस लक्षण पर उपयुक्त है । हृदय के विकारों में हृदय की कार्यक्षमता बढाने के लिए इसका उपयोग होता है । कोरोना जैसे संक्रामक ज्वर के उपरांत हृदय को आई कमजोरी, इसके सेवन से दूर होने में सहायता होती है । १५ दिनों से १ माह तक, एक-एक गोली का चूर्ण दिन में २ बार शहद के साथ चुभलाकर लें । यह औषधि वैद्य के परामर्श से लें ।
यह औषधि अपने मन से न लेते हुए वैद्य के मार्गदर्शनानुसार ही लेनी चाहिए; परंतु कई बार वैद्य के पास तुरंत जाने जैसी स्थिति नहीं होती । कई बार वैद्यों के पास जाने तक औषधि मिलना आवश्यक होता है, तो कई बार थोडा-बहुत औषधि-पानी करने पर वैद्य के पास जाने की आवश्यकता ही नहीं होती । इसलिए ‘प्राथमिक उपचार’ के रूप में यहां कुछ आयुर्वेद की औषधियां दी हैं । यदि औषधि लेकर भी अच्छा न लगे तो यथाशीघ्र स्थानीय वैद्य से परामर्श करें ।
ज्वर (बुखार) में उपयुक्त आयुर्वेद की कुछ औषधियां
आयुर्वेद की कुछ सुवर्णयुक्त औषधियां
श्वसनसंस्था के विकारों में उपयुक्त आयुर्वेद की कुछ औषधियां
आयुर्वेद की औषधियां एवं उनकी समाप्ति तिथि (एक्सपायरी डेट)
लशुनादि वटी (गोलियां)
त्रिफला गुग्गुलु (गोलियां)