युवकों को नशे के अंधकार में ढकेलनेवाले सनबर्न फेस्टिवल का विरोध !

राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन के माध्यम से पाश्‍चात्य भोगवाद को बल प्रदान करनेवाले, हिन्दू संस्कृति के लिए घातक तथा युवक-युवतियों को नशे के अंधकार में ढकेलनेवाले सनबर्न फेस्टिवल का तथा हिन्दुत्वनिष्ठों को झूठे आरोपों में फंसाने के षड्यंत्र का विरोध किया गया ।

गुरुकृपायोग के अनुसार अष्टांग योगमार्ग से साधना करने से गुुरुकृपा शीघ्र होती है ! – योगेश शिर्के, सनातन संस्था

मुंबई में हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित हिन्दू राष्ट्र संगठक प्रशिक्षण कार्यशाला ! आत्मबल बढाने के लिए तथा ईश्‍वरप्राप्ति के लिए साधना आवश्यक है । जीवन में कभी-कभी अपेक्षित प्रयास कर भी सफलता नहीं मिलती । दुख के पीछे आध्यात्मिक कारण होता है, यह मनुष्य के ध्यान में नहीं आता । उसके लिए … Read more

कागद की लुगदी से बनाई गई गणेशमूर्ति हानिकारक होने का वैज्ञानिकदृष्टि से भी प्रमाणित !

हाल ही में कथित पर्यावरणवादी कागद की लुगदी से बनाई जानेवाली श्री गणेशमूर्ति का समर्थन करते हैं, तथापि उसके कारण कितना प्रदूषण होता है, यह भी जान लेना आवश्यक है । 

प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन यदि ३० मिनटोंतक ‘मृत संजीवनी मुद्रा’ की, तो उससे उसका हृदय सशक्त होकर अकालीन आनेवाले हृदयघात का झटका (हार्ट अटैक) आने की मात्रा घटेगी !

प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने हाथ की तर्जनी की नोक का तलुवे से स्पर्श करें तथा अंगूठा, मध्यमा और अनामिका इन उंगलियों की नोकों को एक-दूसरे से लगाएं और यह मृत संजीवनी मुद्रा प्रतिदिन ३० मिनटोंतक करती है, तो उससे उसका हृदय सशक्त रहेगा ।

स्वभावदोष निर्मूलन और अहं निर्मूलन प्रक्रिया

कठिनाई आनेपर उसी के विषय में अधिक समय तक सोचते रहने से मन अशांत होता है और समस्या अधिक विकट बनती है । समस्या आनेपर मन से स्थिर रहकर सोचिए कि ‘इसे हल करना मेरी साधना है ।

ज्ञानप्रबोधिनी या अज्ञानप्रबोधिनी ?

ज्ञानप्रबोधिनी की वटसावित्री पोथी के प्रारंभ में ऐसा उल्लेख है कि ‘पर्यावरण शुद्धि और रक्षा के लिए वटसावित्री की पूजा की जाती है !’ वटवृक्ष (बरगद का वृक्ष) की शुद्ध वायु सेे सत्यवान को होश आया जिससेे सावित्री को आनंद हुआ ।

ईश्‍वर का दर्शन करने के लिए आनेवालों की संख्या में हुई प्रचंड वृद्धि और समस्या का उत्तर

सैकडों वर्ष पूर्व जब देवालयों का निर्माण किया गया, तब कुल जनसंख्या और दर्शन हेतु आनेवाले हिन्दुओं की संख्या मर्यादित थी । देवालय में दर्शन हेतु आनेवालों की संख्या को देखते हुए देवालय का आकार और रचना पूरक थी ।

समाज के उत्थान हेतु ‘साधना’ विषय पर प्रवचनों की ध्वनिफीतियों की निर्मिति के माध्यम से यज्ञ करनेवाले परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी !

परात्पर गुरु डॉक्टरजी ने सनातन संस्था के माध्यम से अध्यात्मप्रसार का कार्य आरंभ किया । इस कार्य-स्वरूप वर्ष १९९० से १९९६ की कालावधि में कुछ जनपद, तहसील तथा शहरों में प.पू. डॉक्टरजी अभ्यासवर्ग लेते थे ।

सोलापुर में सनातन संस्था द्वारा ग्रंथ तथा सात्त्विक उत्पादनी की प्रदर्शनी का आयोजन !

सनातन संस्था की ओर से धर्मरथ के माध्यम से सनातन के ग्रंथ तथा सात्त्विक उत्पादनी की प्रदर्शनी यहां के दत्त चौक, दत्त मंदिर के पास आयोजित की गई । यहां के भाजपा नगरसेवक श्री. विक्रांत (मुन्ना) वानकर के हाथों पूजन कर प्रदर्शनी प्रारंभ किया गया ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में महाराष्ट्र में हिन्दू राष्ट्रजागृति अभियान के अंतर्गत चलाए गए विविध उपक्रम

धर्मप्रेमी तथा साधकों ने बोईसर के श्री हनुमान मंदिर की स्वच्छता की । इस अवसरपर मंदिर के न्यासियों ने मंदिर में मनौती मांगने के लिए अनुमति दी । कोपरखैरणे के श्री चिकानेश्‍वर शिव मंदिर की भी स्वच्छता की गई ।