कश्मीर की ग्रामदेवता श्री शारिकादेवी
१८ भुजाओंवाली श्री शारिकादेवी कश्मीर की ग्रामदेवता है । इस देवी के नामपर ही इस स्थान का नाम श्रीनगर पडा है ।
१८ भुजाओंवाली श्री शारिकादेवी कश्मीर की ग्रामदेवता है । इस देवी के नामपर ही इस स्थान का नाम श्रीनगर पडा है ।
१०.३.२०१८ को रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में आयोजित सौरयाग के दिन भूमिपर सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी के पदचिन्ह अंकित हुए तथा उनमें विविध शुभचिन्ह दिखाई दे रहे थे ।
कृतयुग में अनुभूति हेतु, त्रेतायुग में श्रीरामचंद्र हेतु, द्वापरयुग में धर्मराज हेतु तथा कलियुग में छत्रपति शिवाजी महाराज के लिए आशीर्वादरूप प्रमाणित श्री भवानीदेवी भक्ततारिणी एवं वरप्रसादिनी है ।
चिंचवड़ से शिवसेना सांसद श्रीरंग बार्ने और एडवोकेट (श्रीमती) उर्मिला कालभोर ने 7 अक्टूबर को भवानीमाता मंदिर के आसपास के क्षेत्र में सनातन संस्था निर्मित अमूल्य ग्रंथसंपदा तथा सात्त्विक उत्पादों की भव्य प्रदर्शनी का सौजन्य से अवलोकन किया ।
महाराज ज्ञान माणिक्य ने वर्ष १५०१ में उस समय में जानेवाले रंगमती नामक स्थानपर अर्थात आज की इस टिलीपर त्रिपुरसुंदरी देवी की स्थापना की ।
हिमाचल प्रदेश का श्री ज्वालादेवी मंदिर, देश के महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थलों तथा ५१ शक्तिपीठों में एक है ! यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगडा जनपद में है । राज दक्ष के हाथों अपने पति शिव का अनादर न सह पाने के कारण सती ने यज्ञ में अपनी आहुति दी थी । उससे शिव को बहुत … Read more
विशिष्ट आकृतिबन्धमें पुष्प इस प्रकार चढाएं कि वे आडे-तिरछे न दिखाई दें । अध्यात्मका एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व है – सत्यम्-शिवम्-सुन्दरम् ।
१. शिवगंगा गांव के निकट भागंप्रियादेवी का जागृत स्थान तथा इतिहास १ अ. पार्वती का तप:स्थान इस स्थान पर देवी पार्वती ने शिवजी को प्राप्त करने हेतु तपस्या की थी । यहां पर शिवालय भी है । ऐसा कहा जाता है कि इसी स्थान पर देवी पार्वती यह कहते हुए कि मुझे शिव ही पति के … Read more
हिन्दू राष्ट्र की स्थापना में आ रही बाधाएं दूर हों और संपूर्ण विश्व में सुख एवं शांति बनी रहे, इस हेतु सोलापुर जिले की बार्शी तहसील के कासारवाडी स्थित श्री योगीराज वेद विज्ञान आश्रम में द्वितीय साग्निचित् अश्मेवध महासोमयाग का आयोजन किया गया है ।
गोंडा, उत्तरप्रदेश के मुकुंदनगर गांव में श्री वाराहीदेवी का मंदिर है । मंदिर में अति प्राचीन वटवृक्ष है । जिसकी शाखाएं मंदिर परिसर में फैली हैं । श्री वाराहीदेवी उत्तरी भवानीदेवी के नाम से भी विख्यात हैं ।