धर्मकार्य करते समय ईश्‍वर का अधिष्ठान तथा साधना आवश्यक ! – सद्गुरु (कु.) स्वाती खाडये

अर्जुन के साथ भगवान श्रीकृष्ण थे, इसलिए धर्म-अधर्म के युद्ध में (महाभारत में ) पांडवों की संख्या अल्प होने पर भी वे विजयी हुए । इससे स्पष्ट है कि धर्मकार्य करते समय ईश्‍वर का अधिष्ठान और हमारी साधना होना आवश्यक है ।

वाराणसी के संत कबीर प्राकट्य स्थल के छायाचित्रात्मक दर्शन

संत कबीर गुरू की प्रतीक्षा में थे । उन्होंने वैष्णव संत स्वामी रामानंदजी को अपना गुरु माना था; परंतु स्वामी रामानंदजी ने कबीरजी को शिष्य मानने से मना कर दिया था ।

सनातन संस्था धर्मजागृति का अत्यंत प्रशंसनीय कार्य कर रही है !

‘अखिल भारतवर्षीय धर्मसंघ तथा स्वामी करपात्री फाऊंडेशन के प्रवर श्रद्धेय श्री त्र्यंबकेश्‍वर चैतन्यजी महाराज के गौरवोद्गार प्रवर श्रद्धेय श्री त्र्यंबकेश्‍वर चैतन्यजी महाराज (बाईं ओर) को ‘परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी का छायाचित्रमय जीवनदर्शन’ ग्रंथ भेंट करते हुए सद्गुुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजी देहली : सनातन संस्था के साधक अतिशय मधुरभाषी होते हैं । उनके जीवन की … Read more

गौरी लंकेश हत्या प्रकरण में सनातन संस्था का नाम जोडने के प्रकरण में हिन्दुत्वनिष्ठों ने किया सनातन संस्था का समर्थन

गौरी लंकेश हत्या प्रकरण में सनातन संस्था का नाम जोडने के प्रकरण में हिन्दुत्वनिष्ठों ने को दृढता से सनातन संस्था का समर्थन किया ।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार व्याधि (बीमारी) निवारण के लिए औषधि(दवाई) लेने का उचित मुहूर्त और रोगी की सेवा करनेवाले सेवक की कुंडली के योग

शीघ्र स्वास्थ्य लाभ हो; इसलिए ज्योतिषशास्त्रानुसार व्याधि से ग्रस्त व्यक्ति को धन्वंतरी देवता को प्रार्थना करके औषधि लेनी चाहिए ।

युद्ध की तैयारी, प्रत्यक्ष युद्ध तथा नागरिक

‘युद्धस्य कथा रम्या ।’, ऐसा कहा जाता है; परंतु जब प्रत्यक्ष युद्ध होता है और जब वह असीमित कालावधि तक जारी रहता है, तब वह रम्य न रहकर बहुत ही पीडादायी बन जाता है ।

महाराष्ट्र के पूर्ण एवं अर्ध शक्तिपीठ तथा उनका कार्य

महालक्ष्मी पीठ अपने सर्व ओर लट्टूसमान वलयांकित ज्ञानशक्तिका भ्रमण दर्शित करता है । भवानी पीठ अपने केंद्रबिंदुसे क्रियाशक्तिका पुंज क्षेपित करता है, तो रेणुका पीठ क्षात्रतेजसे आवेशित किरणोंका क्षेपण करता है ।

जालस्थल ‘सनातन डॉट ऑर्ग’ के माध्यम से अगस्त २०१९ में सनातन संस्था का अध्यात्मप्रसार का कार्य

सनातन संस्था के जालस्थल से भेंट करनेवाले पाठकों के अतिरिक्त सामाजिक जालस्थल के अतिरिक्त सामाजिक जालस्थल के माध्यम से सनातन संख्या से जुडे हुए पाठकों का भी एक अलग वर्ग होने से उस संदर्भ में भी जानकारी प्रकाशित कर रहे हैं ।

आनंदप्राप्ती के लिए साधना करना आवश्यक ! – सद्गुरु नंदकुमार जाधव, सनातन संस्था

केवल अध्यात्मशास्त्र ही हमें आनंद की अनुभूति दे सकता है । उसके लिए सभी को साधना करना आवश्यक है । – ऐसें सनातन संस्था के सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी ने यावल (जनपद जळगांव, महाराष्ट्र) में मार्गदर्शन में बताया ।

मिरज (जनपद सांगली, महाराष्ट्र) के नाथ संप्रदाय के उपासक श्री. संतोष सदाशिव दाभाडे (माऊली) द्वारा रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम का अवलोकन !

श्री. संतोष सदाशिव दाभाडे (माऊली) नाथ संप्रदाय से संबंधित हैं । चौथी कक्षा में शिक्षा लेते समय से लेकर उन्हें सूक्ष्म से ज्ञान प्राप्त हो रहा है ।