संगीताभ्यास कैसे करना चाहिए ?
ऐसा कहा जाता है कि संगीत एक ईश्वरीय देन है और जिसपर ईश्वर की कृपा है, वह गा सकता है; परंतु ईश्वर ने सभी को स्वयं के क्रियमाण के आधारपर अपना स्वप्न साकार करने की शक्ति दी है ।
ऐसा कहा जाता है कि संगीत एक ईश्वरीय देन है और जिसपर ईश्वर की कृपा है, वह गा सकता है; परंतु ईश्वर ने सभी को स्वयं के क्रियमाण के आधारपर अपना स्वप्न साकार करने की शक्ति दी है ।
थिरूवनंतपुरम् के प्रसिद्ध म्युजिओलॉजिस्ट (वस्तुसंग्रहालय विशेषज्ञ) श्री. सतीश सदाशिवन् ने १३ अक्टूबर को यहां के सनातन आश्रम का अवलोकन किया ।
वृंदावन के महामंडलेश्वर कापालिक स्वामी बालयोगेश्वरानंद गिरीजी महाराज (औघड) ने १० अक्टूबर को यहां के सनातन आश्रम का अवलोकन किया ।
साधकों को विविध कारणों से होनेवाले शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक कष्ट दूर हों, इसके लिए महर्षि भृगु महर्षिजी द्वारा बताए जाने के अनुसार यहां के सनातन आश्रम में श्री कालभैरवपूजन, २ दिनों का ‘महाचंडीयाग’, साथ ही सप्तर्षियों की आज्ञा के अनुसार श्री बगलामुखी यज्ञ किया गया ।
अध्यात्म में कर्मफलसिद्धांत को महत्त्वपूर्ण माना गया है । कर्म का फल अटल होता है । किए गए कर्मों का फल पाप-पुण्य के रूप में भोगना पडता है ।
व्यसनमुक्त होने के लिए सहस्रोें रुपए का व्यय करनेपर भी व्यसन छुटेगा, ऐसा नहीं होता; क्योंकि व्यसन लगने के पीछे पूर्वजों का कष्ट अथवा अनिष्ट शक्तियों का कष्ट जैसे कष्ट हो सकते हैं ।
‘रूट्स इन कश्मीर’के प्रवक्ता अमित रैना ने बताया, ‘‘वर्ष १९८६ के पश्चात धर्मांधों ने कश्मीर के कई मंदिरों को अपना लक्ष्य बनाया था ।
श्रीनगर से ३० कि.मी. की दूरीपर स्थित तुल्लमुल्ल का सुप्रसिद्ध श्री खीर भवानीदेवी का मंदिर ! कश्मीर के गंदेरबल जनपद में स्थित यह मंदिर हिन्दुओं के लिए महत्त्वपूर्ण स्थान है ।
आदिमानव प्रकृति में मिलनेवाले कंदमूल, फल एवं पशुओं की शिकार कर उसका मांस खाता था । प्रकृति में विद्यमान स्वच्छ हवा और ताजा बनाए गए अन्न के कारण वह निरोगी था ।
मिट्टी के घर बनाते समय भी आयुर्वेद, वास्तुशास्त्र आदि शास्त्रों में दिए गए निर्देशों का पालन किया जाता था । ऐसे घरों को केरल में ‘आयुरगृह’ कहते हैं ।