श्री दुर्गादेवीतत्त्व आकर्षित करनेवाली सात्त्विक रंगोलियां

विशेषकर मंगलवार एवं शुक्रवारके दिन देवीपूजनसे पूर्व तथा नवरात्रिकी कालावधिमें घर अथवा देवालयोंमें देवीतत्त्व आकृष्ट  एवं प्रक्षेपित करनेवाली सात्त्विक रंगोलियां बनाएं ।

कन्नूर (केरल) के कृष्णा ज्वेल्स एवं कृष्णा बीच रिसॉर्ट के संचालक प्रमोद कुमार द्वारा रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम का अवलोकन

कन्नूर (केरल) के कृष्णा ज्वेल्स एवं कृष्णा बीच रिसॉर्ट के संचालक श्री. प्रमोद कुमार ने १७ अक्टूबर को यहां के सनातन आश्रम का अवलोकन किया ।

रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में तीन दिवसीय साधना शिविर का उद्घाटन

सनातन संस्था की ओर से १८ से २० अक्टूबर की कालावधि में आयोजित तीन दिवसीय साधना शिविर का आयोजन किया गया ।

नवरात्रोत्सव के उपलक्ष्य में उत्तर प्रदेश एवं बिहार में आयोजित सनातन संस्था की ग्रंथप्रदर्शनियों का जिज्ञासुओं द्वारा उत्स्फूर्त प्रत्युत्तर !

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के दुर्गाकुण्ड, संकठा देवी का मंदिर, नटवा का नटकेश्वरी मंदिर एवं कानपूर के संकटमोचन धाम मंदिर में सनातन संस्था के ग्रंथ एवं सात्त्विक उत्पादों की प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया था ।

संगीताभ्यास कैसे करना चाहिए ?

ऐसा कहा जाता है कि संगीत एक ईश्‍वरीय देन है और जिसपर ईश्‍वर की कृपा है, वह गा सकता है; परंतु ईश्‍वर ने सभी को स्वयं के क्रियमाण के आधारपर अपना स्वप्न साकार करने की शक्ति दी है ।

थिरूवनंतपुरम् (केरल) के म्युजिओलॉजिस्ट (वस्तुसंग्रहालय विशेषज्ञ) श्री. सतीश सदाशिवन् द्वारा रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम का अवलोकन

थिरूवनंतपुरम् के प्रसिद्ध म्युजिओलॉजिस्ट (वस्तुसंग्रहालय विशेषज्ञ) श्री. सतीश सदाशिवन् ने १३ अक्टूबर को यहां के सनातन आश्रम का अवलोकन किया ।

वृंदावन के महामंडलेश्‍वर कापालिक स्वामी बालयोगेश्‍वरानंद गिरीजी महाराज (औघड) द्वारा रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम का अवलोकन

वृंदावन के महामंडलेश्वर कापालिक स्वामी बालयोगेश्वरानंद गिरीजी महाराज (औघड) ने १० अक्टूबर को यहां के सनातन आश्रम का अवलोकन किया ।

नवरात्रोत्सव की कालावधि में रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में श्री कालभैरवपूजन, महाचंडी याग एवं श्री बगलामुखी याग !

साधकों को विविध कारणों से होनेवाले शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक कष्ट दूर हों, इसके लिए महर्षि भृगु महर्षिजी द्वारा बताए जाने के अनुसार यहां के सनातन आश्रम में श्री कालभैरवपूजन, २ दिनों का ‘महाचंडीयाग’, साथ ही सप्तर्षियों की आज्ञा के अनुसार श्री बगलामुखी यज्ञ किया गया ।

भावना के स्तरपर किसी भी प्रकार का असंवैधानिक कृत्य करने की सनातन संस्था की सीख नहीं है !

अध्यात्म में कर्मफलसिद्धांत को महत्त्वपूर्ण माना गया है । कर्म का फल अटल होता है । किए गए कर्मों का फल पाप-पुण्य के रूप में भोगना पडता है ।

मदिरापान के अधीन एक व्यक्ति द्वारा नामजप एवं आध्यात्मिक उपायों का आरंभ किए जाने के पश्‍चात केवल १ ही मास में उसका व्यसन छूट जाना, यह सनातन संस्था द्वारा बताई गई साधना की श्रेष्ठता !

व्यसनमुक्त होने के लिए सहस्रोें रुपए का व्यय करनेपर भी व्यसन छुटेगा, ऐसा नहीं होता; क्योंकि व्यसन लगने के पीछे पूर्वजों का कष्ट अथवा अनिष्ट शक्तियों का कष्ट जैसे कष्ट हो सकते हैं ।